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Friday, June 1, 2018

*ये सदा इसी भ्रम में रहते आये है।*

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*असली हिन्दू मुर्गे*
एक कसाई था। पिंजरेनुमा जाली में मुर्गो को रखता था। जैसे-जैसे ग्राहक आते, वो एक-एक मुर्गा निकालकर काटकर बेचता जाता। जब भी कसाई पिंजरे में हाथ डालता तो सभी मुर्गे आराम से दाना चुगने में मस्त रहते। कोई शोर शराबा नहीं होता था। मजे की बात देखिये कि वो जब भी मुर्गा हलाल करने के लिये पिंजरे मे हाथ डालता तो केवल वही मुर्गा चिल्लाता था, जिसे कसाई ने पकड़ा होता था। बाकी मुर्गे आराम से दाना चुगने मे व्यस्त रहते थे। यूँ एक-एक करके शाम तक पूरा पिंजरा खाली हो चुका रहता था l उसके एक मित्र ने एक दिन पूछा की तुम्हारे मुर्गे कभी शोर नहीं मचाते ? ऐसा क्यों ?
*वह कसाई बोला। मैं इन मुर्गों को कह देता हूँ कि तुम हिन्दू हो ! तुम कभी मिट नहीं सकते ! तुम आराम से दाना चुगों* !
अगर कोई विपत्ति आएगी , तो तुम्हारे पड़ोसी पर ही आएगी , तुम पर कभी कोई विपत्ति नहीं आएगी !
*ये सदा इसी भ्रम में रहते आये है।*
इसीलिए पहले ईरान, इराक, अफगानिस्तान, बर्मा, नेपाल ,पाकिस्तान, म्यांमार इनके हाथ से निकल गया !
अब कश्मीर, असम, बंगाल, केरल, कैराना, उत्तर प्रदेश इनके हाथ से निकलने वाला है , न इन्हें गजवा-ए-हिन्द से कोई अंतर पड़ता है, न लव जिहाद से, न ISIS से, न शरिया से !
*इन्हें बस दाना (धंधा) मिलता रहे.... इनकी जेब पर कोई भार ना आये, सस्ता पेट्रोल, सस्ती दाल, प्याज , चीनी  मिलती रहे ....ये कुछ नहीं करेंगे !*
ये मुर्गे असली हिन्दू है !
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* Real Hindu Chicken *
There was a butcher. Pingrenuma kept the chickens in the mesh. As customers came, they used to cut and sell each one cock. Whenever the butcher put his hand in the cage, all the poultry would have been comfortable with churning the grain. There was no noise drowsy. Have fun, see whenever he puts his hand in the cage to make a cock, then only he would scream the cock, which was caught by the butcher. The remaining poultry was busy resting the pimple. Once the whole cage had remained empty till one evening. One of his friends asked one day that your poults never make noise. Why so ?
 * She spoke butchers. I tell these cats that you are a Hindu! You can never end! * You Chubby Dana Chubby!
If any calamity comes, then your neighbor will come only, you will never face any disaster!
 * It has always been in this confusion. *
 That's why Iran, Iraq, Afghanistan, Burma, Nepal, Pakistan, Myanmar, first came out of their hands!
Now Kashmir, Assam, Bengal, Kerala, Karaana, Uttar Pradesh are going to come out of their hands, or they do not make any difference to Gajwa-i-Hind, neither love jihad nor ISIS, nor from Sharia!
 * They are getting the dana (business) ... there is no burden on their pockets, cheap petrol, cheap pulses, onions, sugar will keep on getting together .... They will not do anything! *
These poultry is real Hindu
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अच्छे दिन कब आयेंगे ?

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.                              अच्छे दिन कब आयेंगे ?
       बन्दरों का एक समूह था, जो फलो के बगिचों मे फल तोड़ कर खाया करते थे। माली की मार और डन्डे भी खाते थे, रोज पिटते थे !
      उनका एक सरदार भी था जो सभी बंदरो से ज्यादा समझदार था। एक दिन बन्दरों के कर्मठ और जुझारू सरदार ने सब बन्दरों से विचार-विमर्श कर निश्चय किया कि रोज माली के डन्डे खाने से बेहतर है कि यदि हम अपना फलों का बगीचा लगा लें तो इतने फल मिलेंगे की हर एक के हिस्से मे १५,१५ फल आ सकते है, हमे फल खाने मे कोई रोक टोक भी नहीं होगी और हमारे "अच्छे दिन आ जाएंगे"
     सभी बन्दरों को यह प्रस्ताव बहुत पसन्द आया । जोर शोर से गड्ढे खोद कर फलो के बीज बो दिये गये ।
     पूरी रात बन्दरों ने बेसब्री से इन्तज़ार किया और सुबह देखा तो फलो के पौधे भी नहीं आये थे ! जिसे देखकर बंदर भड़क गए और सरदार को गरियाने लगे और नारे लगाने लगे, "कहा है हमारे १५,१५ फल", क्या यही अच्छे दिन है ?
      सरदार ने इनकी मुर्खता पर अपना सिर पिट लिया और हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हुए बोला, "भाईयो और बहनो, अभी तो हमने बीज बोया है, मुझे थोड़ा समय और दे दो, फल आने मे थोड़ा समय लगता है।" इस बार तो बंदर मान गए।

इन मूर्खो को 15 लाख मोदी से चाहिय !

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स्विट्जरलैंड!!
नाम तो आपने सुना ही होगा 'स्विट्जरलैंड'!! ऐसा देश जहाँ दुनियां का हर शादीशुदा जोड़ा अपना हनीमून मनाने के ख्वाब देखता हैं। बर्फीली वादियों से ढका ये देश सुंदरता की अद्भुत कृति हैं हरियाली हो या बर्फ! आंखे जिधर भी जाये पलक झपकना भूल जाये!! दुनियां का सबसे सम्पन देश हैं स्विट्जरलैंड! हर प्रकार से सम्पन इस देश की एक रोचक कहानी बताता हूँ ...
आज से लगभग 50 साल पहले स्विट्जरलैंड में एक प्राइवेट बैंक की स्थापना हुई जिसका नाम था 'स्विसबैंक' इस बैंक के नियम दुनियां की अन्य बैंको से भिन्न थे ये स्विसबैंक अपने ग्राहकों से उसके पैसे के रखरखाव और गोपनीयता के बदले उल्टा ग्राहक से पैसे वसूलती थी साथ ही गोपनीयता की गारंटी !!
न ग्राहक से पूछना की पैसा कहां से आया ?
न कोई सवाल न बाध्यता !!
सालभर में इस बैंक की ख्याति विश्वभर में फैल चुकी थी ..चोर..बेईमान नेता!...या माफिया... तस्कर..
बड़े बिजनेस मेन इन सबकी पहली पसंद बन चुकी थी स्विस बैंक ! बैंक का एक ही नियम था रिचार्ज कार्ड की तरह एक नम्बर खाता धारक को दिया जाता साथ ही एक पासवर्ड दिया जाता बस!! जिसके पास वह नम्बर होगा बैंक उसी को जानता था न डिटेल न आगे पीछे की पूछताछ होती!!
लेकिन बैंक का एक नियम था कि अगर सात साल तक कोई ट्रांजेक्शन नही हुआ या खाते को सात साल तक नही छेड़ा गया तो बैंक खाता सीज करके रकम पर अधिकार जमा कर लेगा! सात वर्ष तक ट्रांजेक्शन न होने की सूरत में रकम बैंक की !!!

मोदी जी, खजाना भर गया ।

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#न #बासी #बचे #न #कुत्ता #खाय
भाजपा पढ़े-लिखे मूर्खों की पार्टी है । जब भी भाजपा की सरकार बनती है वह पाँच साल तक देश के खजाने को भरने में लगी रहती है । खजाना तो डबडबा जाता है पर सुविधाभोगी आम जनता परेशान हो जाती है । परेशानी की मानसिक दशा में वह कांग्रेस या विपक्षी गठबंधन को जिता देती है । फिर कांग्रेस भाजपा द्वारा अर्जित कोष का जमकर उपभोग करती है । कुछ मुफ्त के नाम पर जनता को परोसती है तो कुछ घटक-नारायण कर जाती है । इस तरह पाँच साल जनता भी खुश और पार्टी भी मदमस्त । खुशी के मारे पुनः पाँच साल के लिए कांग्रेस को चुनती है । पर तब तक खजाना डोल चुका होता है । पाँच साल में जनता इतनी त्रस्त हो जाती है कि फिर भाजपा को चुनती है और वह फिर देश का मुद्रा कोष भरने लगती है ।
वाजपेयी जी के समय से यही हो रहा है । देश के खाली पड़े खजाने को उन्होंने विदेशी प्रतिबन्धों (परमाणु विस्फोट के कारण) के बावजूद भरा । वित्तीय अनुशासन को सुविधाभोगी लोग सह न पाए और UPA को चुन लिया । UPA ने वाजपेयी जी के कमाए दौलत को उड़ाकर पाँच साल लोगों को मौज करवाया और पुनः सत्ता में आए । पर तब तक खजाना खाली हो चुका था और मनमोहन सिंह जी को कहना पड़ा था कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते । देश में संसाधनों की कमी हो जाने के कारण विभिन्न समूहों में उसे हासिल करने की होड़ बढ़ गई जिसके कारण मनमोहन सिंह जी को फिर बयान जारी करना पड़ा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है । अंत में जनता परेशान होकर मोदी जी को चुना और मोदी जी फिर देश की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ करने में लगे हैं और सुविधाभोगी लोग परेशान हो रहे हैं ।

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