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Thursday, May 24, 2018

;कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा .

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युवाओं के मन मे एक प्रश्न का बना हुआ था *"कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा ?"*
अब इसका उत्तर मिल गया है और सिनेमा चला भी अच्छा है जो चलना ही चाहिऐ था ।
अब इस देश के लिए ये जानना जरूरी है कि
*नेताजी सुभाष चन्द्र बोस* को क्यूँ और किसने मारा,
*श्री लाल बहादुर शास्त्री* को किसने और क्यों मारा?
*महात्मा गांधी* की हत्या के वह कारण क्या थे?
इन दुर्भाग्यशाली घटनाओं से देश की पटरी ही बदल गयी।
युवाओं! ज़रा विचारो कि कहाँ कहाँ गलतियां हुई हैं.. काल्पनिक चरित्र कटप्पा से बाहर निकलो और *वो_पूछो_जो_तुमसे_जुड़ा_हुआ_है.....*
पता करो कि हम लगभग 1000 साल तक गुलाम क्यों रहे..
*पता करो कि जो देश आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक, और वैज्ञानिक रूप से सशक्त था.. विश्व गुरु था ...वो सब ज्ञान कहाँ और कैसे खत्म हो गया..*
पता करो कि सोने की चिड़िया के पंख कैसे कतर दिए गए...
पता करो कि हमारे बच्चों को आजादी के बाद भी क्या और क्यूँ पढ़ाया जाता है...
पता करो! पाकिस्तान का स्थायी रोग किसने भारत को दिया? तब हुआ क्या-क्या था?
पता करो..! कि कश्मीर को नासूर बनाने का बीज नेहरू ने क्यों और कैसे बोया..?
*पता करो..! नेपाल के महाराजा के भारत में विलय के प्रस्ताव को 1952 में नेहरू ने क्यों ठुकरा दिया था?*
पता करो..! कि 1953 में UNO में भारत को स्थायी सीट देने के ख़ुद अमेरिका के प्रस्ताव को नेहरू ने क्यों गुमा दिया था? और वह सदस्यता चीन को क्यों दिला दी?

ज़्यादातर जानकारी के अभाव में लोग यह क्लेम सरकार से नहीं लेते हैं ।

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*Accidental Death*  & *Compensation*
*(Income Tax Return Required)*
अगर किसी व्यक्ति की accidental death होती है और वह व्यक्ति पिछले तीन साल से लगातार इनकम टैक्स रिटर्न फ़ाइल कर रहा था तो उसकी पिछले तीन साल की एवरेज सालाना इनकम की दस गुना राशि उस व्यक्ति के परिवार को देने के लिए सरकार बाध्य है ।
जी हाँ,
आपको आश्चर्य हो रहा होगा यह सुनकर लेकिन यह बिलकुल सही है
और
सरकारी नियम है ,
उदहारण के तौर पर अगर किसी की सालाना आय क्रमशः
पहले दूसरे और तीसरे साल    चार लाख,पांच लाख और छः लाख है
तो उसकी औसत आय पांच लाख का दस गुना मतलब पचास लाख रूपए उस व्यक्ति के परिवार को सरकार से मिलने का हक़ है।
ज़्यादातर जानकारी के अभाव में लोग यह क्लेम सरकार से नहीं लेते हैं ।
जाने वाले की कमी तो कोई पूरी नहीं कर सकता है लेकिन अगर पैसा पास में हो तो भविष्य सुचारू रूप से चल सकता है ।
अगर लगातार तीन साल तक रिटर्न दाखिल नहीं किया है तो ऐसा नहीं है कि परिवार को पैसा नहीं मिलेगा लेकिन ऐसे केस में सरकार एक डेढ़ लाख देकर किनारा कर लेती है लेकिन अगर लगातार तीन साल तक लगातार रिटर्न फ़ाइल किया गया है तो ऐसी स्थिति में केस ज़्यादा मजबूत होता है

अपने जीवन मे थोङा सा भी परिवर्तन लायेगे तो इस मैसेज को भेजने का उद्देश्य पूरा होगा

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कोई-कोई  मैसेज  वाकई  कमाल होता
है आप स्वयं पढ़िये….

      
कितना सत्य है ना…..?
भक्ति जब भोजन में प्रवेश करती है,
भोजन ” प्रसाद “बन जाता है.।
             
भक्ति जब भूख में प्रवेश करती है,
भूख ” व्रत ” बन  जाती है.।
          
भक्ति जब पानी में प्रवेश करती है,
पानी ” चरणामृत ” बन जाता है.।
           
भक्ति जब सफर में प्रवेश करती है,
सफर ” तीर्थयात्रा ” बन जाता है.।
            
भक्ति जब संगीत में प्रवेश करती है,
संगीत ” कीर्तन ” बन जाता है.।
            
भक्ति जब घर में प्रवेश करती है,
घर ” मन्दिर ” बन जाता है.।
            
भक्ति जब कार्य में प्रवेश करती है,
कार्य ” कर्म ” बन जाता है.।
           
भक्ति जब क्रिया में प्रवेश करती है,
क्रिया “सेवा ” बन जाती है.। और…
           
भक्ति जब व्यक्ति में प्रवेश करती है,
व्यक्ति ” मानव ” बन जाता है..।
 ❓|||||||||  प्रश्नोत्तर  |||||||||
Qus→ जीवन का उद्देश्य क्या है ?
Ans→ जीवन का उद्देश्य उसी चेतना को जानना है - जो जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है। उसे जानना ही मोक्ष है..!!


Qus→ जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त कौन है ?
Ans→ जिसने स्वयं को, उस आत्मा को जान लिया - वह जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त है..!!

Qus→संसार में दुःख क्यों है ?
Ans→लालच, स्वार्थ और भय ही संसार के दुःख का मुख्य कारण हैं..!!

Qus→ ईश्वर ने दुःख की रचना क्यों की ?
Ans→ ईश्वर ने संसार की रचना की और मनुष्य ने अपने विचार और कर्मों से दुःख और सुख की रचना की..!!

Qus→ क्या ईश्वर है ? कौन है वे ? क्या रुप है उनका ? क्या वह स्त्री है या पुरुष ?
Ans→ कारण के बिना कार्य नहीं। यह संसार उस कारण के अस्तित्व का प्रमाण है। तुम हो, इसलिए वे भी है - उस महान कारण को ही आध्यात्म में ‘ईश्वर‘ कहा गया है। वह न स्त्री है और ना ही पुरुष..!!

Qus→ भाग्य क्या है ?
Ans→हर क्रिया, हर कार्य का एक परिणाम है। परिणाम अच्छा भी हो सकता है, बुरा भी हो सकता है। यह परिणाम ही भाग्य है तथा आज का प्रयत्न ही कल का भाग्य है..!!

Qus→ इस जगत में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है ?
Ans→ रोज़ हजारों-लाखों लोग मरते हैं और उसे सभी देखते भी हैं, फिर भी सभी को अनंत-काल तक जीते रहने की इच्छा होती है..
इससे बड़ा आश्चर्य ओर क्या हो सकता है..!!

Qus→किस चीज को गंवाकर मनुष्य
धनी बनता है ?
Ans→ लोभ..!!

अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने.

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पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं
1. युधिष्ठिर    2. भीम    3. अर्जुन
4. नकुल।      5. सहदेव
( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )
यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन
की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी ।
वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र…..
कौरव कहलाए जिनके नाम हैं
1. दुर्योधन      2. दुःशासन   3. दुःसह
4. दुःशल        5. जलसंघ    6. सम
7. सह            8. विंद         9. अनुविंद
10. दुर्धर्ष       11. सुबाहु।   12. दुषप्रधर्षण
13. दुर्मर्षण।   14. दुर्मुख     15. दुष्कर्ण
16. विकर्ण     17. शल       18. सत्वान
19. सुलोचन   20. चित्र       21. उपचित्र
22. चित्राक्ष     23. चारुचित्र 24. शरासन
25. दुर्मद।       26. दुर्विगाह  27. विवित्सु
28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ
31. नन्द।        32. उपनन्द   33. चित्रबाण
34. चित्रवर्मा    35. सुवर्मा    36. दुर्विमोचन
37. अयोबाहु   38. महाबाहु  39. चित्रांग 40. चित्रकुण्डल41. भीमवेग  42. भीमबल
43. बालाकि    44. बलवर्धन 45. उग्रायुध
46. सुषेण       47. कुण्डधर  48. महोदर
49. चित्रायुध   50. निषंगी     51. पाशी
52. वृन्दारक   53. दृढ़वर्मा    54. दृढ़क्षत्र
55. सोमकीर्ति  56. अनूदर    57. दढ़संघ 58. जरासंघ   59. सत्यसंघ 60. सद्सुवाक
61. उग्रश्रवा   62. उग्रसेन     63. सेनानी
64. दुष्पराजय        65. अपराजित
66. कुण्डशायी        67. विशालाक्ष
68. दुराधर   69. दृढ़हस्त    70. सुहस्त
71. वातवेग  72. सुवर्च    73. आदित्यकेतु
74. बह्वाशी   75. नागदत्त 76. उग्रशायी
77. कवचि    78. क्रथन। 79. कुण्डी
80. भीमविक्र 81. धनुर्धर  82. वीरबाहु
83. अलोलुप  84. अभय  85. दृढ़कर्मा
86. दृढ़रथाश्रय    87. अनाधृष्य
88. कुण्डभेदी।     89. विरवि
90. चित्रकुण्डल    91. प्रधम
92. अमाप्रमाथि    93. दीर्घरोमा
94. सुवीर्यवान     95. दीर्घबाहु
96. सुजात।         97. कनकध्वज
98. कुण्डाशी        99. विरज
100. युयुत्सु
( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहनभी थी… जिसका नाम""दुशाला""था,
जिसका विवाह"जयद्रथ"सेहुआ था )
"श्री मद्-भगवत गीता"के बारे में
ॐ . किसको किसने सुनाई?
उ. श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।
ॐ . कब सुनाई?
उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।
ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?
उ.- रविवार के दिन।
ॐ. कोनसी तिथि को?
उ.- एकादशी
ॐ. कहा सुनाई?
उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।
ॐ. कितनी देर में सुनाई?
उ.- लगभग 45 मिनट में
ॐ. क्यू सुनाई?
उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।
ॐ. कितने अध्याय है?
उ.- कुल 18 अध्याय
ॐ. कितने श्लोक है?
उ.- 700 श्लोक
ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है?
उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।
ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा
और किन किन लोगो ने सुना?
उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने
ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?
उ.- भगवान सूर्यदेव को
ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?
उ.- उपनिषदों में
ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?
उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।
ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है?
उ.- गीतोपनिषद
ॐ. गीता का सार क्या है?
उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना
ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?
उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574
अर्जुन ने- 85
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40.
अपनी युवा-पीढ़ी को गीता जी के बारे में जानकारी पहुचाने हेतु इसे ज्यादा से ज्यादा शेअर करे। धन्यवाद
अधूरा ज्ञान खतरना होता है।
33 करोड नहीँ  33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू
धर्म मेँ।
कोटि = प्रकार।
देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है,
कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।
हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...
कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-
12 प्रकार हैँ
आदित्य , धाता, मित, आर्यमा,
शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,
सविता, तवास्था, और विष्णु...!
8 प्रकार हे :-
वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।
11 प्रकार है :-
रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक,
अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,
रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।
एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।
कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी
अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है
तो इस जानकारी को अधिक से अधिक
लोगो तक पहुचाएं। ।

१ हिन्दु हाेने के नाते जानना ज़रूरी है
This is very good information for all of us ... जय श्रीकृष्ण ...
अब आपकी बारी है कि इस जानकारी को आगे बढ़ाएँ ......
अपनी भारत की संस्कृति
को पहचाने.
ज्यादा से ज्यादा
लोगो तक पहुचाये.
खासकर अपने बच्चो को बताए
क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा...
  दो पक्ष-
कृष्ण पक्ष ,
शुक्ल पक्ष

भगत सिंह की फांसी में नेहरु और गाँधी चुप्पी साध ली l

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*किताबों को खंगालने से हमें यह पता चला*
कि ‘बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय‘ (BHU) के संस्थापक *पंडित मदनमोहन मालवीय जी* नें 14 फ़रवरी 1931 को Lord Irwin के सामने *भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव* की फांसी रोकने के लिए Mercy Petition दायर की थी ताकि उन्हें फांसी न दी जाये और कुछ सजा भी कम की जाएl Lord Irwin ने तब मालवीय जी से कहा कि आप कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष है इसलिए आपको इस Petition के साथ नेहरु, गाँधी और कांग्रेस के कम से कम 20 अन्य सदस्यों के पत्र भी लाने होंगेl
जब मालवीय जी ने भगत सिंह की फांसी रुकवाने के बारे में नेहरु और गाँधी से बात की तो उन्होंने इस बात पर चुप्पी साध ली और अपनी सहमति नहीं दीl इसके अतिरिक्त गाँधी और नेहरु की असहमति के कारण ही कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी अपनी सहमति नहीं दीl
*Retire होने के बाद Lord Irwin ने स्वयं London में कहा था कि "यदि नेहरु और गाँधी एक बार भी भगत सिंह की फांसी रुकवाने की अपील करते तो हम निश्चित ही उनकी फांसी रद्द कर देते, लेकिन पता नहीं क्यों मुझे ऐसा महसूस हुआ कि गाँधी और नेहरु को इस बात की हमसे भी ज्यादा जल्दी थी कि भगत सिंह को फांसी दी जाए”*
Prof. Kapil Kumar की किताब के अनुसार ”गाँधी और Lord Irwin के बीच जब समझौता हुआ उस समय इरविन इतना आश्चर्य में था कि गाँधी और नेहरु में से किसी ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को छोड़ने के बारे में चर्चा तक नहीं कीl”

*जिहै,उसतना जीवन मिला जीवन का भरपूर आनन्द लीजिये !*

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*सिकंदर उस जल की तलाश में था, जिसे पीने से मानव अमर हो जाते हैं.!*
*काफी दिनों तक  दुनियाँ में भटकने के पश्चात आखिरकार उस ने वह जगह पा ही ली, जहाँ उसे अमृत की प्राप्ति हो*
 *उसके सामने ही अमृत जल बह रहा था, वह अंजलि में अमृत को लेकर पीने के लिए झुका ही था कि तभी एक बुढा व्यक्ती जो उस गुफा के भीतर बैठा था, जोर से बोला,  रुक जा, यह भूल मत करना...!’*
*बड़ी दुर्गति की अवस्था में था वह बुढा !*
*सिकंदर ने कहा, ‘तू रोकने वाला कौन...?

पत्नी पे निबन्ध लिखो

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मास्टर जी – *पत्नी पे निबन्ध लिखो ❓*
                                         छात्र – *पत्नी पर निबंध*
Answer - पत्नी नामक प्राणी भारत सहित पूरे विश्व में बहुतायत पाई जाती है।
प्राचीन समय में यह भोजन शाला में पाई जाती थी, लेकिन वर्तमान में यह *शॉपिंग मॉल्स , थिएटर्स  एवं रेस्तरा* के नजदीक विचरती हुई अधिक पाई जाती है।
पहले इस प्रजाति में *लम्बे बाल, सुन्दर आकृति* प्रायः पाये जाते थे। लेकिन अब *छोटे बाल, कृत्रिम श्वेत मुख, रक्त के सामान होठ* सामान्य रूप से देखे जा सकते है।
इनका मुख्य आहार पति नामक मूक प्राणी होता है। भारत में इन्हें *धर्मपत्नी, भाग्यवती, लक्ष्मी* नामो से भी जाना जाता है।
*अधिक बोलना, अकारण झगड़ना, अति व्यय करना*, इस प्रजाति के मुख्य लक्षणों में से है। हालाकि इस प्रजाति पर सम्पूर्ण अध्ययन करना संभव नहीं है, किन्तु सामान्यतः इनके निम्न प्रकार होते है।
1. *सुशील पत्नी*– यह प्रजाति अब लुप्त हो चुकी है। इस प्रजाति की प्राणी सुशील एवं सहनशील होतीे थी और घरो में ज्यादा पाई जाती थीे।
2. *आक्रामक पत्नी* – यह प्रजाति भारत सहित पूरे विश्व में बहुत अधिक मात्रा में पाई जाती है। ये अपनी आक्रामक शैली, एवं तेज प्रहार के लिए जानी जाती है। समय आने पर ये *बेलन, झाड़ू और चरण पादुकाओँ* का उपयोग अधिक करती है।
3. *झगडालू पत्नी* – यह प्रजाति भी वर्तमान में सभी जगह पायी जाती है। इन्हें जॊर से बोलना और झगड़ा करना अत्यंत पसंद होता है। इनका अधिकतर सामना *“सास”* नामक एक और अत्यंत खतरनाक प्राणी से होता है।

वो अपने देश को दुनियाँ में सबसे समृद्ध बनाना चाहता है..

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उसे अगर वोट ही लेना होता तो वो,
कभी नोटबंदी नहीं करता कभी भी GST नहीं लाता,
उसे वोट ही लेना होता तो वो कभी सब्सिडियाँ ख़त्म नहीं करता, लेकिन
उसने दिल और घुटने के ऑपरेशन के दाम, ढाई लाख से 50 हज़ार करके डॉक्टरों को नाराज़ किया...
उसने 800 दवाओं के दाम कम करके मेडिकल वालो को नाराज किया...
उसने 1% टैक्स लगा कर स्वर्णकारों को नाराज़ किया....
उसने होटल वालों के सर्विस चार्ज पर हथौड़ा चला के, ग्राहकों के हित के लिए होटलवालों से पंगा लिया...
उसने 500 और 1000 के नोट बन्द कर के अपने ही परम्परागत वोट बैंक को नाराज़ किया....
कैश लेस को बढ़ावा दे कर वो टैक्स चोरों के रास्तों का रोड़ा बन गया है....
रेडा जैसा क़ानून कर के बिल्डरों को नाराज़ किया...
बेनामी संपत्ति का क़ानून पारित कर के ज़मीन के काला बाजारियों को बेनक़ाब कर रहा है...
स्पेक्ट्रम, कोयला, आदि का भ्रष्टाचार दूर कर, देश को लाखों करोड़ों का फ़ायदा देने के लिए बड़े उद्योगपतियों से पंगा लिया....
गैस सब्सिडी, मनरेगा, आदि का पैसा सीधे बैंक खाते में जमा करने के कारण सभी बिचौलियों की दुकानें बंद कर दी....

अपनी सोंच सदैव सकारात्मक रखें

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अमेरिका मे जब एक कैदी को फॉसी की सजा सुनाई गई तो वहॉ के कुछ बैज्ञानिकों ने सोचा कि क्यों न इस कैदी पर कुछ प्रयोग किया जाय ! तब कैदी को बताया गया कि हम तुम्हें फॉसी देकर नहीं परन्तु जहरीला कोबरा सॉप डसाकर मारेगें !
और उसके सामने बड़ा सा जहरीला सॉप ले आने के बाद कैदी की ऑखे बंद करके कुर्सी से बॉधा गया और उसको सॉप नहीं बल्कि दो सेफ्टी पिन्स चुभाई गई !
और क्या हुआ कैदी की कुछ सेकेन्ड मे ही मौत हो गई, पोस्टमार्डम के बाद पाया गया कि कैदी के शरीर मे सॉप के जहर के समान ही जहर है ।
अब ये जहर कहॉ से आया जिसने उस कैदी की जान ले ली ......वो जहर उसके खुद शरीर ने ही सदमे मे उत्पन्न किया था । हमारे हर संकल्प से पाजिटीव एवं निगेटीव एनर्जी उत्पन्न होती है और वो हमारे शरीर मे उस अनुसार hormones उत्पन्न करती है ।
75% वीमारियों का मूल कारण नकारात्मक सोंच से उत्पन्न ऊर्जा ही है ।
आज इंसान ही अपनी गलत सोंच से भस्मासुर बन खुद का विनाश कर रहा है ......
अपनी सोंच सदैव सकारात्मक रखें और खुश रहें
25 साल की उम्र तक हमें परवाह नहीँ होती कि "लोग क्या सोचेंगे ? ? "
50 साल की उम्र तक इसी डर में जीते हैं कि " लोग क्या सोचेंगे ! ! "
50 साल के बाद पता चलता है कि
" हमारे बारे में कोई सोच ही नहीँ रहा था ! ! ! "

Life is beautiful, enjoy forever.
When a prisoner was sentenced to death in the US, some of the bosses thought that why not use this prisoner! Then the prisoner was told that we would not give you a fuss, but the poisonous cobra would beat the snake!
After taking a big poisonous snake in front of him, the prisoner's eyes closed and his body was stuck with a chair and he was not snatched, but two safety pins were shocked!
And what happened, the prisoner died in only a few seconds, after the postmortem it was found that the prisoner's body was poisoned just like a poison of snake.
Now this poison came from Kaho who had taken the life of the prisoner ... The poison was his own body that was born in a shock. Positive and negative energy is generated from our every resolve and it produces hormones in our body accordingly.
The root cause of 75% of the diseases is the energy generated from negative thoughts.
Today human beings are being destroyed by their false thinking and destroying themselves ...
Always keep your thoughts positive and be happy
By the age of 25, we would not care that "what will people think?"
By the age of 50, we live in fear that "people will think!"
After 50 years it shows that
"No one was thinking about us!"
Life is beautiful, enjoy forever

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