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Friday, May 18, 2018

किसानो की फसलो के भाव होने चाहिये।।।

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लहसुन का भाव 90 रू किलो से 20 रु
प्याज  80 रू किलो  से 2 रू किलो
सोयाबीन 55 रुपये किलो से 27 रू किलो
मसूर 60 रू किलो से 35 रुपये किलो
आलू 5 रु किलो
टमाटर 5 रु किलो हो गया!!
सच कहु तो किसानों की किसी भी फसल का भाव नही है.... सरकार कोई भी हो हमे कोई मतलब नही.... किसानो की फसलो के भाव होने चाहिये।।।
आज सब चुप बैठे हे क्योंकि भाव तो किसानों की फसल का नहीं हे लेकिन हम एक बात बताना चाहते हे......

hindu marriage act पास करवाया तो "मुस्लिम मेरिज एक्ट" क्यों नहीं ?

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‼️
क्या कोई बताइयेगा कि "जवाहर लाल नेहरू" ने, हिन्दू मेरिज एक्ट hindu marriage act पास करवाया तो "मुस्लिम मेरिज एक्ट" क्यों नहीं ?
क्या भविष्य में नेहरू और इन्दिरा की पू्र्वयोजना थी कि इस देश को कैसे भी "मुस्लिम देश" बनाया जाय? हिन्दू एक शादी करे और हम दो हमारे दो को माने! इन्दिरा ने, जबरदस्ती हिन्दुओं की नसबन्दी करवाई तो मुस्लिम की क्यों नहीं ? ⁉️
मुस्लिम कितनी भी शादियां करे, कोई रोक नहीं! कितने भी बच्चे पैदा करे कोई रोक नहीं !??
इसलिए आज हिन्दू का "वोटबैंक", पूरी तरह कट गया और मुस्लिम "वोटबैंक" चार सौ प्रतिशत बढ गया। 2050 से पहले हमारा देश "मुस्लिम देश" बन जायगा। क्योंकि जिसका "वोटबैंक" होगा, उसी की सरकार और फिर उनके अपने कानून, "हिन्दू जनता" के पर फिर वही अत्याचार जो औरंगजेब  ने किये थे।इसलिए देश की समस्त "हिन्दू" जनता से अनुरोध है  कि एकजुट हो जाओ और भविष्य के खतरे को पहचानो।
देश की समस्त पार्टियाँ मुस्लिम की तरफदारी कर रहीं हैं क्योंकि उन्हें "कुर्सी" चाहिए न कि देश। यदि कुर्सी मिली तो वह इतना धन इकट्ठा कर लेंगे कि जब हिन्दुस्तान जलेगा  तो ये देश छोड़ कर विदेश में भाग जायेंगे। ‼️‼️

सेक्युलरिज़्म विशेषांक :

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सेक्युलरिज़्म विशेषांक :

जिन हिन्दू सेक्युलर भाईयों बहनों के दिल में हमेशा मुस्लिम और ईसाई धर्म के प्रति सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) का कीड़ा कुलबुलाता रहता है ना...... वो हिन्दू सेक्युलर भाई-बहन इस पोस्ट को शुरू से अंत तक खास-तौर पर पढ़ें।

और बाकी के सभी हिन्दू भाईयों-बहनों से विनम्र प्रार्थना है कि वे हिन्दू, हिन्दुत्व एंव हिन्दुस्तान की रक्षा की राह में कृपया सभी  हन्दू सेक्युलर भाई बहनों तक ये पोस्ट पहुंचाने में मदद करें।

#पश्चिमी_अफ्रीका में एक देश है। जिसका नाम #गाम्बिया है।

ये देश बेहद गरीब और पिछड़े क्षेत्रों में आता है। लेकिन कभी ये इलाका बेहद हरा भरा हुआ करता था और यहाँ धरती ही माँ बन कर यहाँ के निवासियों का भरण-पोषण किया करती थी।

लेकिन अचानक ही इस देश पर अंग्रेजों की नजर गयी और विश्व विजयी बनने के उन्मादी अंग्रेजों ने वहां धीरे धीरे अपनी जड़ें जमानी शुरू कर दीं। और अंग्रेज इसमें सफल हुए और उन्होंने गाम्बिया को जीतकर अपना गुलाम बना लिया।

उन्हें यहाँ के बलिष्ठ लोग अपने लिए एक सस्ते गुलाम के रूप में दिखने लगे और धीरे धीरे सारा गाम्बिया उनकी गिरफ्त में आ गया।

लेकिन जहाँ दमन होता है वहां क्रान्ति जरूर होती है और गाम्बिया में भी कुछ ऐसा ही हुआ।

गाम्बिया में जनजातियाँ थी और उन्होंने अंग्रेजों से लोहा लेना शुरू किया। ना-ना, चरखे और बिना खड्ग बिना ढाल नहीं बल्कि सीधे तौर पर तीर और तलवारों से।

आख़िरकार काफी लम्बे संघर्ष के बाद वहां के लोगों ने 1965 में स्वतंत्र गाम्बिया के दर्शन किये।

अब अंग्रेजों ने गाम्बिया को आज़ाद तो कर दिया लेकिन जाते जाते अंग्रेज गाम्बिया में सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) का कीड़ा अथवा सिद्धांत थोप कर चले गये।

जिसके फलस्वरूप गाम्बिया के मूल लोगों ने 1965 से खुद को #सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) के रंग में रंग लिया। इस आशा व उम्मीद के साथ कि उनके साथ सभी लोग ही सेक्युलर (धर्म-निरपेक्ष) हैं।

लेकिन धीरे-धीरे मुस्लिम आबादी वंहा बढती गयी। उसके बाद लोगों के धर्मांतरण का सिलसिला चल पड़ा। वंही दूसरी तरफ धर्मांतरण ना करने वाले जनसंख्या वृद्धि में मुसलमानों से वैसे ही बहुत ज्यादा पिछड़ गये।

जिसका नतीजा ये हुआ कि धीरे-धीरे वहां मुस्लिम आबादी बढ़ कर इस हालत में आ गयी कि वहां इस्लामिक कानून की मांग और शरिया आदि की चर्चाएँ शुरू हो गयीं।

यद्यपि बाकी अन्य लोग अभी तक भी इस बात को लेकर ही खुश थे कि गाम्बिया का सिद्धांत और कानून धर्म-निरपेक्ष है, जोकि वहां हमेशा ही बना रहेगा।

लेकिन धीरे-धीरे जब गाम्बिया में मुस्लिम आबादी 90% के पार हो गयी तो 2015 में अचानक ही एक दिन सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) के सभी सिद्धांत अचानक ही टूट गये और राष्ट्रपति के तौर पर एक इस्लामिक चेहरा याहया जामेह सामने आया, जिसने गाम्बिया के राष्ट्रपति का पद सम्भाल लिया।

मुसलमानों की आबादी 90% हो जाने के कारण उन्हें प्रचंड जीत मिली और विपक्षी सेक्युलरों (धर्मनिरपेक्षों) की जमानत तक जब्त होने की नौबत आ गयी और वो नाम मात्र के विपक्षी बन कर रह गये।

सेक्युलर धर्मनिरपेक्ष मुल्क नहीं बल्कि एक इस्लामिक देश है। और सभी को इस्लाम के नियम और कायदों का पालन करना होगा।

जो भी इस्लाम के नियमों और कायदों का पालन करेगा उसको उस देश में रहने का अधिकार है, अन्यों को नहीं।

इस फैसले से अचानक ही सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) का राग अलापने वालों और सेक्युलर (धर्मनिरपेक्ष) बन कर जीने वालों के पैरों तले की जमीन खिसक गयी और उन्होंने खुद को ठगा सा पाया। लेकिन जब तक वो सब समझते तब तक संसद , सरकार, अदालत, फ़ौज, पुलिस सब कुछ राष्ट्रपति के अधीन हो चुका था। यानी कि खेत को चिड़ियाँ चुग चुकी थी। और वहां के सेक्युलर लोगों को इस कानून को मानने पर बाध्य होना पड़ा।

आज वहां के अल्पसंख्यक हो चुके गैर इस्लामिक लोग मात्र दोयम दर्जे के नागरिक बन कर रह गये हैं। जिनका ध्यान रखने वाला अथवा ख़बर-सार लेने वाला कोई नहीं है।

गाम्बिया के राष्ट्रपति याहया जामेह को इस फैसले के लिए किसी भी मानवाधिकार, अन्तराष्ट्रीय अदालत, संयुक्त राष्ट्र, नाटो आदि की सहमित लेने की जरूरत नहीं हुई और अब गाम्बिया एक शुद्ध इस्लामिक मुल्क बन चुका है। जहाँ धर्म निरपेक्षता की बात करना भी क़ानूनन जुर्म है।

और सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) का वही गन्दा कीड़ा या सिद्धान्त अंग्रेजों ने जाते-जाते हिन्दुस्तान में भी छोड़ा था। जिसे 1947 से लेके आज तक #कांग्रेस भली-भांति पाल कर फलीभूत कर रही है।

सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) की वजह से ख़त्म होने वाला गाम्बिया तुम्हारे सामने एक ताज़ा एवं एक जिंदा उदाहरण है। और ये कोई बहुत पुराने इतिहास की बात नही है। बल्कि 1965 से 2015 तक सिर्फ़ 50 सालों के दरमियान की ही बात है। क्यूंकि जब सन 1900 में जन्में कुछ बुजुर्ग आज तक जिंदा हैं तो गाम्बिया तो फिर भी 1965 में आज़ाद हुआ था।

इसलिये अगर आप दुनियां को सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) का पैगाम देना भी चाहते हैं तो, तो आप बजाये सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) के, हिन्दू धर्म की मान्यताओं एवं संस्कृति के पालन के तहत किसी भी जीव को हानि ना पहुंचाकर एवं उनकी सेवा, सुरक्षा कर फिर चाहे वो चींटी, कुत्ता अथवा कोई कीट-पतंगा ही क्यूँ ना हो..... करुणा, दया अथवा जीव प्रेम के रूप में जीव-निरपेक्षता अथवा प्राणी-निरपेक्षता का पैगाम दें, ना कि सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) का।

जबकि हिन्दुत्व को हानि पहुंचाने वाले के तो आपको सिर्फ और सिर्फ खिलाफ ही खड़ा होना पड़ेगा। क्योंकि अगर आप चुप रहेंगे तो भी आप मूक बनकर वा खिलाफत ना कर एक तरहां से धर्म की हानि करने वालों का ही गुप्त रूप में साथ दे देंगे।

इसलिए हे ! हिन्दुओ ख़ुद भी जागो और दूजे हिन्दुओं को भी जगाओ। वरना आज तो गाम्बिया सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) की वजहा से खत्म होने वाले देश के रूप में तुम्हारे सामने उदाहरण बना है। लेकिन अगर हम हिन्दू एक ना हुए अथवा हिंदुत्व को तोड़ने वाली गन्दी राजनीतिक पार्टियों के षड्यंत्र का शिकार हो आपस में ही एक दूसरे से लड़ते रहे तो आने वाले कुछ वर्षों में हिन्दुस्तान को इस्लामिक राष्ट्र बनवा, सेक्युलरिज़्म (धर्मनिरपेक्षता) से खत्म होने वाले एक अन्य मुल्क हिन्दुस्तान का ताजा उदाहरण तुम खुद ही विश्व के सामने पेश कर दोगे ।

इसलिए जाग जाओ हिन्दुओ और अपने हिन्दू धर्म, हिन्दुत्व, हिन्दुस्तान एंव हिन्दुस्तान की संस्कृति का इस्लामीकरण एवं ईसाईकरण होने से बचा लो। क्यूँकि खेत चुग चुगने के बाद सिवाय पछतावे के कुछ भी हाथ ना आएगा।

वेदना है, भावना है, अमाँ संहसास है

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माँ संवेदना है, भावना है, अहसास है
माँ जीवन के फूलों में, खूशबू का वास है
माँ रोते हुए बच्चे का, खुशनुमा पालना है
माँ मरूस्थल में नदी या मीठा-सा झरना है
माँ लोरी है, गीत है, प्यारी-सी थाप है
माँ पूजा की थाली है, मंत्रो का जाप है
माँ आँखो का सिसकता हुआ किनारा है
माँ ममता की धारा है, गालों पर पप्पी है,
माँ बच्चों के लिए जादू की झप्पी है
माँ झुलसते दिनों में, कोयल की बोली है
माँ मेंहँदी है, कुंकम है, सिंदूर है, रोली है
माँ त्याग है, तपस्या है, सेवा है

इस दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंसान कौन है.

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*बूढ़ा पिता अपने IAS बेटे के चेंबर में  जाकर उसके कंधे पर हाथ रख कर खड़ा हो गया !*
*और प्यार से अपने पुत्र से पूछा...*
*"इस दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंसान कौन है"?*
*पुत्र ने पिता को बड़े प्यार से हंसते हुए कहा "मेरे अलावा कौन हो सकता है पिताजी "!*
*पिता को इस जवाब की  आशा नहीं थी, उसे विश्वास था कि उसका बेटा गर्व से कहेगा पिताजी इस दुनिया के सब से शक्तिशाली इंसान आप हैैं, जिन्होंने मुझे इतना योग्य बनाया !*
*उनकी आँखे छलछला आई !*
*वो चेंबर के गेट को खोल कर बाहर निकलने लगे !*
*उन्होंने एक बार पीछे मुड़ कर पुनः बेटे से पूछा एक बार फिर बताओ इस दुनिया का सब से शक्तिशाली इंसान कौन है ???*
       *पुत्र ने  इस बार कहा...*
         *"पिताजी आप हैैं,*
       *इस दुनिया के सब से*
        *शक्तिशाली इंसान "!*

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