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Monday, April 9, 2018

Cholestrol, BP ya heart attack आने की मुख्य वजह है, और दावा ।

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महत्वपूर्ण समाचार
SHARE करे और सबको भेजे
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ये याद रखिये की भारत मैं सबसे ज्यादा मौते कोलस्ट्रोल बढ़ने के कारण हार्ट अटैक से होती हैं।
आप खुद अपने ही घर मैं ऐसे बहुत से लोगो को जानते होंगे जिनका वजन व कोलस्ट्रोल बढ़ा हुआ हे।
अमेरिका की कईं बड़ी बड़ी कंपनिया भारत मैं दिल के रोगियों (heart patients) को अरबों की दवाई बेच रही हैं !
लेकिन अगर आपको कोई तकलीफ हुई तो डॉक्टर कहेगा angioplasty (एन्जीओप्लास्टी) करवाओ।
इस ऑपरेशन मे डॉक्टर दिल की नली में एक spring डालते हैं जिसे stent कहते हैं।
यह stent अमेरिका में बनता है और इसका cost of production सिर्फ 3 डॉलर (रू.150-180) है।
इसी stent को भारत मे लाकर 3-5 लाख रूपए मे बेचा जाता है व आपको लूटा जाता है।
डॉक्टरों को लाखों रूपए का commission मिलता है इसलिए व आपसे बार बार कहता है कि angioplasty करवाओ।
Cholestrol, BP ya heart attack आने की मुख्य वजह है, Angioplasty ऑपरेशन।
यह कभी किसी का सफल नहीं होता।
क्यूँकी डॉक्टर, जो spring दिल की नली मे डालता है वह बिलकुल pen की spring की तरह होती है।
कुछ ही महीनो में उस spring की दोनों साइडों पर आगे व पीछे blockage (cholestrol व fat) जमा होना शुरू हो जाता है।
इसके बाद फिर आता है दूसरा heart attack ( हार्ट अटैक )
डॉक्टर कहता हें फिर से angioplasty करवाओ।
आपके लाखो रूपए लुटता है और आपकी जिंदगी इसी में निकल जाती हैं।
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               अब पढ़िए<script async src="//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js"></script>
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       उसका आयुर्वेदिक इलाज
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अदरक (ginger juice) -
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यह खून को पतला करता है।
यह दर्द को प्राकृतिक तरीके से 90% तक कम करता हें।
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लहसुन (garlic juice)
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इसमें मौजूद allicin तत्व cholesterol व BP को कम करता है।
वह हार्ट ब्लॉकेज को खोलता है।
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नींबू (lemon juice)
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इसमें मौजूद antioxidants, vitamin C व potassium खून को साफ़ करते हैं।
ये रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) बढ़ाते हैं।
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एप्पल साइडर सिरका ( apple cider vinegar)
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इसमें 90 प्रकार के तत्व हैं जो शरीर की सारी नसों को खोलते है, पेट साफ़ करते हैं व थकान को मिटाते हैं।
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         इन देशी दवाओं को
       इस तरह उपयोग में लेवें
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1-एक कप नींबू का रस लें;
2-एक कप अदरक का रस लें; 
3-एक कप लहसुन का रस लें;
4-एक कप एप्पल का सिरका लें;
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चारों को मिला कर धीमीं आंच पर गरम करें जब 3 कप रह जाए तो उसे ठण्डा कर लें;
अब आप
उसमें 3 कप शहद मिला लें
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रोज इस दवा के 3 चम्मच सुबह खाली पेट लें जिससे
सारी ब्लॉकेज खत्म हो जाएंगी।
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आप सभी से हाथ जोड़ कर विनती है कि इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करें ताकि सभी इस दवा से अपना इलाज कर  सकें ; धन्यवाद् !
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     ऐसे में दिल के दौरे से बचने
            के लिए ये उपाय
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        आप सबसे निवेदन है
  चुटकले फोटो भेजने की बजाय
       यह सन्देश सबको भेजे
   ताकि लोगो की जान बच सके
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मुझे भी एक मित्र ने भेजा
अब आप की बारी है
जनहित में प्रसारित
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(Posted as received).                   
           Important news
SHARE AND SEND TO ALL
What do they do?
Keep in mind that the most deaths in India are due to heart attack due to increased cholesterol.
You must know many people in my own house whose weight and cholesterol have increased.
Many US companies are selling billions of medicines to India's heart patients!
But if you have any problems, then the doctor will say you have angioplasty.
In this operation, the doctor puts a spring in the heart valve called stent.
This stent is made in the US and its cost of production is just $ 3 (Rs.150-180).
This stent is brought to India and sold in 3-5 lakh rupees and you are robbed.
Doctors get commission of lakhs of rupees and therefore repeatedly tells you to do angioplasty.
Cholestrol, BP or heart attack is the main reason why, the operation of the angioplasty
This is never successful for anyone
Because the doctor, who puts in the spring heart tube, is exactly like the spring of pen.
In just a few months, cholestrol and fat deposits on both sides of the spring begin to accumulate in front and back.
After this comes the second heart attack.
Doctor says to get the angioplasty again
Loots millions of rupees and your life goes out in it.
What do they do?
               Read now
       His Ayurvedic treatment
What do they do?
Ginger juice -
What do they do?
It dilutes blood.
This reduces the pain naturally by 90%.
What do they do?
Garlic juice
DOES I
The allicin element present in it reduces cholesterol and BP.
He opens the heart blockage.
What do they do?
Lemon juice
What do they do?
Antioxidants present in it, vitamin C and potassium cleans the blood.
These diseases increase immunity.
What do they do?
Apple cider vinegar
What do they do?
There are 90 types of elements that open all the nerves in the body, cleanse the stomach and remove fatigue.
What do they do?
         These indigenous drugs
       Use this way
What do they do?
Take 1-cup lemon juice;
Take 2 cups of ginger juice;
3-Take a cup of garlic juice;
Take a 4-cup apple vinegar;
What do they do?
Mix all four on a low flame, when it is 3 cups, refrigerate it;
now you
Add 3 cup honey to it
What do they do?
Take 3 teaspoons of this medicine daily in the morning with an empty stomach
The entire blockage will end.
What do they do?
By joining hands with all of you, request that you spread this message as much as possible so that everyone can treat themselves with this medicine; Thank you!
What do they do?
     Avoid heart attacks
            These solutions for
             ● DOES I
        You are the most requested
  Rather than sending jokes
       Send this message to everyone
   So that the survival of the people
What do they do?
Sent me a friend too
it's your turn now
Broadcast in public
 
What do they do?
(Posted as received).

डा. अंबेडकर जी की दोनों पुस्तकें - अछूत कौन और कैसे तथा शूद्रों की खोज -

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दूध का दूध पानी का पानी !
6 दिसंबर 1956 को माननीय डा. अंबेडकर जी का देहावसान हुआ । कानपुर के वैदिक गवेषक पंडित शिवपूजन सिंह जी का चर्चित 'भ्रांति निवारण' सोलह पृष्ठीय लेख 'सार्वदेशिक ' मासिक के जुलाई-अगस्त 1951अंक में उनके देहावसान के पांच वर्ष तीन माह पूर्व प्रकाशित हुआ । डा. अंबेडकर जी इस मासिक से भलीभांति परिचित थे और तभी यह चर्चित अंक भी उनकी सेवा में.भिजवा दिया गया था । लेख डा. अंबेडकर के वेदादि विषयक विचारों की समीक्षा में 54 प्रामाणिक उद्धरणों के साथ लिखा गया था। इसकी प्रति विदर्भ के वाशिम जनपद के आर्य समाज कारंजा के प्राचीन ग्रंथालय में सुरक्षित है।
              आशा थी कि अंबेडकर जी जैसे प्रतिभाशाली विद्वान या तो इसका उत्तर देते या फिर अपनी पुस्तकें बताये गये अकाट्य तथ्यों की रोशनी में संपादित करते। लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ भी नहीं किया। ऐसा इसलिये कि जो जातिगत भेदभाव और अपमान उन्होंने लगातार सहा उसकी वेदना और विद्रोह ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया।
                         डा. अंबेडकर जी की दोनों पुस्तकें - अछूत कौन और कैसे तथा शूद्रों की खोज - पर लेख शंका समाधान शैली में लिखा गया था पर डा. कुशलदेव शास्त्री जी ने इसे सुविधा और सरलता हेतु संवाद शैली में रुपांतरित किया है जिसे यहां प्रस्तुत किया जा रहा है। इस लेख को स्वामी जी द्वारा लिखित 'ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका' के आलोक में पढ़कर सत्यासत्य का निर्णय सहर्ष लिया जा सकता है ।
1 - ' अछूत कौन और कैसे '
डा. अंबेडकर- आर्य लोग निर्विवाद रूप से दो हिस्सों और दो संस्कृतियों में विभक्त थे,जिनमें से एक ऋग्वेदीय आर्य और दूसरे यजुर्वेदीय आर्य , जिनके बीच बहुत बड़ी सांस्कृतिक खाई थी।ऋग्वेदीय आर्य यज्ञों में विश्वास करते थे,अथर्ववेदीय जादू-टोना में।
पंडित शिवपूजन सिंह- दो प्रकार के आर्यों की कल्पना केवल आपके और आप जैसे कुछ मस्तिकों की उपज है।यह केवल कपोल कल्पना या कल्पना विलास है।इसके पीछे कोई ऐसा ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।कोई ऐतिहासिक विद्वान भी इसका समर्थन नहीं करता।अथर्ववेद में किसी प्रकार का जादू टोना नहीं है।
डा. अंबेडकर- ऋग्वेद में आर्यदेवता इंद्र का सामना उसके शत्रु अहि-वृत्र (सांप देवता) से होता है,जो कालांतर में नाग देवता के नाम से प्रसिध्द हुआ।
पं. शिवपूजन सिंह- वैदिक और लौकिक संस्कृत में आकाश पाताल का अंतर है।यहाँ इंद्र का अर्थ सूर्य और वृत्र का अर्थ मेघ है।यह संघर्ष आर्य देवता और और नाग देवता का न होकर सूर्य और मेघ के बीच में होने वाला संघर्ष है।वैदिक शब्दों के विषय में.निरुक्त का ही मत मान्य होता है।वैदिक निरूक्त प्रक्रिया से अनभिज्ञ होने के कारण ही आपको भ्रम हुआ है।
डा. अंबेडकर- महामहोपाध्याय डा. काणे का मत है कि गाय की पवित्रता के कारण ही वाजसनेही संहिता में गोमांस भक्षण की व्यवस्था की गयी है।
पं. शिवपूजन सिंह- श्री काणे जी ने वाजसनेही संहिता का कोई प्रमाण और संदर्भ नहीं दिया है और न ही आपने यजुर्वेद पढ़ने का कष्ट उठाया है।आप जब यजुर्वेद का स्वाध्याय करेंगे तब आपको स्पष्ट गोवध निषेध के प्रमाण मिलेंगे।
डा. अंबेडकर- ऋग्वेद से ही यह स्पष्ट है कि तत्कालीन आर्य गोहत्या करते थे और गोमांस खाते थे।
पं. शिवपूजन सिंह- कुछ प्राच्य और पाश्चात्य विद्वान आर्यों पर गोमांस भक्षण का दोषारोपण करते हैं , किंतु बहुत से प्राच्य विद्वानों ने इस मत का खंडन किया है।वेद में गोमांस भक्षण विरोध करने वाले 22 विद्वानों के मेरे पास स-संदर्भ प्रमाण हैं।ऋग्वेद से गोहत्या और गोमास भक्षण का आप जो विधान कह रहे हैं , वह वैदिक संस्कृत और लौकिक संस्कृत के अंतर से अनभिज्ञ होने के कारण कह रहे हैं । जैसे वेद में'उक्ष' बलवर्धक औषधि का नाम है जबकि लौकिक संस्कृत में भले ही उसका अर्थ 'बैल' क्यों न हो ।
डा. अंबेडकर- बिना मांस के मधुपर्क नहीं हो सकता । मधुपर्क में मांस और विशेष रूप से गोमांस का एक आवश्यक अंश होता है ।
पं. शिवपूजन सिंह- आपका यह विधान वेदों पर नहीं अपितु गृह्यसूत्रों पर आधारित है । गृहसूत्रों के वचन वेद विरूध्द होने से माननीय नहीं हैं । वेद को स्वत: प्रमाण मानने वाले महर्षि दयानंद सरस्वती जी के अनुसार," दही में घी या शहद मिलाना मधुपर्क कहलाता है । उसका परिमाण 12 तोले दही में चार तोले शहद या चार तोले घी का मिलाना है ।"
डा. अंबेडकर- अतिथि के लिये गोहत्या की बात इतनी सामान्य हो गयी थी कि अतिथि का नाम ही 'गोघ्न' , अर्थात् गौ की हत्या करना पड़ गया था ।
प. शिवपूजन सिंह- 'गोघ्न' का अर्थ गौ की हत्या करने वाला नहीं है । यह शब्द 'गौ' और 'हन' के योग से बना है। गौ के अनेक अर्थ हैं , यथा - वाणी , जल , सुखविशेष , नेत्र आदि। धातुपाठ में महर्षि पाणिनि 'हन' का अर्थ 'गति' और 'हिंसा' बतलाते हैं।गति के अर्थ हैं - ज्ञान , गमन , और प्राप्ति । प्राय: सभी सभ्य देशों में जब किसी के घर अतिथि आता है तो उसके स्वागत करने के लिये गृहपति घर से बाहर आते हुये कुछ गति करता है , चलता है,उससे मधुर वाणी में बोलता है , फिर जल से उसका सत्कार करता है और यथासंभव उसके सुख के लिये अन्यान्य सामग्रियों को प्रस्तुत करता है और यह जानने के लिये कि प्रिय अतिथि इन सत्कारों से प्रसन्न होता है नहीं , गृहपति की आंखें भी उस ओर टकटकी लगाये रहती हैं । 'गोघ्न' का अर्थ हुआ - ' गौ: प्राप्यते दीयते यस्मै: स गोघ्न: ' = जिसके लिये गौदान की जाती है , वह अतिथि 'गोघ्न' कहलाता है ।
डा. अंबेडकर- हिंदू ब्राह्मण हो या अब्राह्मण , न केवल मांसाहारी थे , किंतु गोमांसहारी भी थे ।
प. शिवपूजन सिंह- आपका कथन भ्रमपूर्ण है, वेद में गोमांस भक्षण की बात तो जाने दीजिये मांस भक्षण का भी विधान नहीं है ।
डा. अंबेडकर- मनु ने गोहत्या के विरोध में कोई कानून नहीं बनाया । उसने तो विशेष अवसरों पर 'गो-मांसाहार' अनिवार्य ठहराया है ।
पं. शिवपूजन सिंह- मनुस्मृति में कहीं भी मांसभक्षण का वर्णन नहीं है । जो है वो प्रक्षिप्त है । आपने भी इस बात का कोई प्रमाण नहीं दिया कि मनु जी ने कहां पर गोमांस अनिवार्य ठहराया है। मनु ( 5/51 ) के अनुसार हत्या की अनुमति देनेवाला , अंगों को काटने वाला , मारनेवाला , क्रय और विक्रय करने वाला , पकाने वाला , परोसने वाला और खानेवाला इन सबको घातक कहा गया है ।
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2- ' शूद्रों की खोज '
डा. अंबेडकर- पुरूष सूक्त ब्राह्मणों ने अपनी स्वार्थ सिध्दि के लिये प्रक्षिप्त किया है।कोल बुक का कथन है कि पुरूष सूक्त छंद और शैली में शेष ऋग्वेद से सर्वथा भिन्न है।अन्य भी अनेक विद्वानों का मत है कि पुरूष सूक्त बाद का बना हुआ है।
पं. शिवपूजन सिंह- आपने जो पुरूष सूक्त पर आक्षेप किया है वह आपकी वेद अनभिज्ञता को प्रकट करता है।आधिभौतिक दृष्टि से चारों वर्णों के पुरूषों का समुदाय - 'संगठित समुदाय'- 'एक पुरूष' रूप है।इस समुदाय पुरूष या राष्ट्र पुरूष के यथार्थ परिचय के लिये पुरुष सूक्त के मुख्य मंत्र ' ब्राह्मणोSस्य मुखमासीत्...' (यजुर्वेद 31/11) पर विचार करना चाहिये।
उक्त मंत्र में कहा गया है कि ब्राह्मण मुख है , क्षत्रिय भुजाएँ , वैश्य जङ्घाएँ और शूद्र पैर। केवल मुख , केवल भुजाएँ , केवल जङ्घाएँ या केवल पैर पुरुष नहीं अपितु मुख , भुजाएँ , जङ्घाएँ और पैर 'इनका समुदाय' पुरुष अवश्य है।वह समुदाय भी यदि असंगठित और क्रम रहित अवस्था में है तो उसे हम पुरूष नहीं कहेंगे।उस समुदाय को पुरूष तभी कहेंगे जबकि वह समुदाय एक विशेष प्रकार के क्रम में हो और एक विशेष प्रकार से संगठित हो।
राष्ट्र में मुख के स्थानापन्न ब्राह्मण हैं , भुजाओं के स्थानापन्न क्षत्रिय हैं , जङ्घाओं के स्थानापन्न वैश्य और पैरों के स्थानापन्न शूद्र हैं । राष्ट्र में चारों वर्ण जब शरीर के मुख आदि अवयवों की तरह सुव्यवस्थित हो जाते हैं तभी इनकी पुरूष संज्ञा होती है । अव्यवस्थित या छिन्न-भिन्न अवस्था में स्थित मनुष्य समुदाय को वैदिक परिभाषा में पुरुष शब्द से नहीं पुकार सकते ।
        आधिभौतिक दृष्टि से यह सुव्यवस्थित तथा एकता के सूत्र में पिरोया हुआ ज्ञान , क्षात्र , व्यापार- व्यवसाय , परिश्रम-मजदूरी इनका निदर्शक जनसमुदाय ही 'एक पुरुष' रूप है।
चर्चित मंत्र का महर्षि दयानंद जी इसप्रकार अर्थ करते हैं-
                "इस पुरूष की आज्ञा के अनुसार विद्या आदि उत्तम गुण , सत्य भाषण और सत्योपदेश आदि श्रेष्ठ कर्मों से ब्राह्मण वर्ण उत्पन्न होता है । इन मुख्य गुण और कर्मों के सहित होने से वह मनुष्यों में उत्तम कहलाता है और ईश्वर ने बल पराक्रम आदि पूर्वोक्त गुणों से युक्त क्षत्रिय वर्ण को उत्पन्न किया है।इस पुरुष के उपदेश से खेती , व्यापार और सब देशों की भाषाओं को जानना और पशुपालन आदि मध्यम गुणों से वैश्य वर्ण सिध्द होता है।जैसे पग सबसे नीचे का अंग है वैसे मूर्खता आदि गुणों से शूद्र वर्ण सिध्द होता है।"
           आपका लिखना कि पुरुष सूक्त बहुत समय बाद जोड़ दिया गया सर्वथा भ्रमपूर्ण है।मैंने अपनी पुस्तक " ऋग्वेद दशम मण्डल पर पाश्चात्य विद्वानों का कुठाराघात " में संपूर्ण पाश्चात्य और प्राच्य विद्वानों के इस मत का खंडन किया है कि ऋग्वेद का दशम मण्डल , जिसमें पुरूष सूक्त भी विद्यमान है , बाद का बना हूआ है ।
डा. अंबेडकर- शूद्र क्षत्रियों के वंशज होने से क्षत्रिय हैं।ऋग्वेद में सुदास , तुरवाशा , तृप्सु,भरत आदि शूद्रों के नाम आये हैं।
पं. शिवपूजन सिंह- वेदों के सभी शब्द यौगिक हैं , रूढ़ि नहीं । आपने ऋग्वेद से जिन नामों को प्रदर्शित किया है वो ऐतिहासिक नाम नहीं हैं । वेद में इतिहास नहीं है क्योंकि वेद सृष्टि के आदि में दिया गया ज्ञान है ।
डा. अंबेडकर- छत्रपति शिवाजी शूद्र और राजपूत हूणों की संतान हैं (शूद्रों की खोज ,  दसवां अध्याय , पृष्ठ , 77-96)
पं. शिवपूजन सिंह- शिवाजी शूद्र नहीं क्षत्रिय थे।इसके लिये अनेक प्रमाण इतिहासों.में भरे पड़े हैं । राजस्थान के प्रख्यात इतिहासज्ञ महामहोपाध्याय डा. गौरीशंकर हीराचंद ओझा , डी.लिट् , लिखते हैं- ' मराठा जाति दक्षिणी हिंदुस्तान की रहने वाली है । उसके प्रसिद्ध राजा छत्रपति शिवाजी के वंश का मूल पुरुष मेवाड़ के सिसौदिया राजवंश से ही था।' कविराज श्यामल दास जी लिखते है - ' शिवाजी महाराणा अजय सिंह के वंश में थे। ' यही सिध्दांत डा. बालकृष्ण जी , एम. ए. , डी.लिट् , एफ.आर.एस.एस. , का भी था।
इसी प्रकार राजपूत हूणों की संतान नहीं किंतु शुध्द क्षत्रिय हैं । श्री चिंतामणि विनामक वैद्य , एम.ए. , श्री ई. बी. कावेल , श्री शेरिंग , श्री व्हीलर , श्री हंटर , श्री क्रूक , पं. नगेन्द्रनाथ भट्टाचार्य , एम.एम.डी.एल. आदि विद्वान राजपूतों को शुध्द क्षत्रिय मानते हैं।प्रिवी कौंसिल ने भी निर्णय किया है कि जो क्षत्रिय भारत में रहते हैं और राजपूत दोनों एक ही श्रेणी के हैं ।
- ' आर्य समाज और डा. अंबेडकर,
डा. कुशलदेव शास्त्री
(अरुण लवानिया)

थोड़ा मनोरंजन हो जाए ।।।।

No comments :
Kuch  manoranjan ho Jaye                        
आज का हिंदी ज्ञान :
Air Hostess =    हवाई सुंदरी
Nurse =              दवाई सुंदरी
Lady Teacher = पढ़ाई सुंदरी
Maid =               सफ़ाई सुंदरी.
Some one added:
Wife =                लड़ाई सुंदरी
Girl frnd =          पराई सुंदरी
         कृपया लेखक का नाम न पुछे  
लेखक लेख लिखने के बाद से फरार है
कुदरत का सबसे बडा सच ::--
 यदि आप फूलों पर सो रहे हैं
        तो ये आपकी पहली रात है l
 और यदि फूल आप पर सो रहे
        है तो ये आपकी आखिरी रात है l
(अजब तेरी दुनिया गज़ब तेरा खेल)
®®®
 मोमबत्ती जलाकर मुर्दों को याद
        किया जाता है l
 और मोमबत्ती बुझाकर जन्म
        दिन मनाया जाता है l
(कैसी विडम्बना है हमारे देश की)
®®®
 फूलन देवी डाकू होकर भी
        चुनाव जीत गई थी l
 और किरन बेदी पुलिस वाली
        होकर भी हार गई l
(किस्मत के खेल निराले मेरे भैया)

कितनी अजीब दुनिया हैं, जहाँ औरतें ‘दूसरी औरतों
की शिकायते करते नहीं थकती,
जबकि पुरूष ‘दूसरी औरतों’ की तारीफ करते नहीँ
थकते !!!
पुरुष सच में महान हैं !!

5 चीजें जो खत्म होने पे बहुत तकलीफ देते हैं
1. दोस्ती
2. पैसा
3. प्यार
4. रविवार और
5. इंटरनेट पेक
लास्ट वाला तो रुला ही देता है…


 पुराने जमाने में जब कोई
अकेला बैठकर हंसता था, तो लोग
कहते थे… कि इसपर कोई भूत-
प्रेत का सांया है..!!
आज कोई अकेले में बैठकर हंसता है
तो कहते हैं…
मुझे भी SEND कर दे

भारत अब साफ सुथरा रहेगा क्योंकि अब पूरी ,
" निरमा वाशिंग पाउडर " की टीम
" संसद " में मौजूद है ...!!
हेमा ,
रेखा ,
जया ,
और
सुषमा ,
सबकी पसंद ,निरमा .....

एकदम लेटेस्ट है.......।                         
Kuch Manoranjan Ho Jaye
Today's Hindi knowledge:
Air Hostess = Air Hostess
Nurse = Beauty Beauty
Lady Teacher = Studying Beauty
Maid = Cleansing beauty
Some one added:
Wife = Action Beauty
Girl frnd = Good morning
         Please do not ask the author's name 
The writer is absconding after writing the article
The biggest truth of nature is: -
 If you are sleeping on flowers
        So this is your first night
 And if the flowers are sleeping on you
        So this is your last night
(Ajab thy terrible world is your game)
®®®®
को Remember the candles by burning candles
        Is done
 and candle-free birth
        The day is celebrated
(What is the irony of our country)
®®®®
 Phoolan Devi by being a robber
        The election was won
 and Kiran Bedi cop
        I lost but
(Game of fortune my brother)

There are strange worlds where women 'second ladies
Do not tire of complaining,
While men do not appreciate 'other women'
Tired !!!
Men are really great !!

5 Things that give a lot of trouble to the end
1. friendship
2. Money
3. Love
4. Sunday and
5. Internet peck
The last person only roulette ... 


 In the olden times when someone
Laughing alone, people were laughing
It was said ... that a ghost-
The shadow of the ghost is .. !!
Today someone laughs and laughs
say so…
Send me also

India will be clean now because now,
 Team of "Nirma Washing Powder"
 "Parliament" is present in ... !!
Hema ,
line ,
Jaya,
And
Sushma ,
Everyone likes, Nirma ..... 

The latest is ....... 

SC,SC- एक्ट के हो रहे दुरूपयोग के कारण ये सब हुआ।।

No comments :
*माननीय सर्वोच्च न्यायलय का वो केस जिस पर ये सब हुआ:- सभी को जानकारी के लिए*
*सुप्रीम कोर्ट केस क्रमांक 416/ 2018 -  सारांश*
गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ फार्मेसी कराड के एक SC ST जाति के स्टोर कीपर की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में उनके सीनियर ने विपरीत टिप्पणी दर्ज की।  स्टोर कीपर ने उनके विरुद्ध SC ST एट्रोसिटी एक्ट के तहत FIR पुलिस  में दर्ज कर दी। पुलिस ने उन अधिकारियो को गिरफ्तार करने हेतु डायरेक्टर ऑफ टेक्निकल एजुकेशन से अनुमति मांगी जिसे मंजूर नहीं की गई । इसके   करीब  5 साल बाद उक्त स्टोर कीपर ने डायरेक्टर टेक्निकल एजुकेशन के विरुध्द FIR दर्ज करवा दी। (पेज 3 ,4). डायरेक्टर ने अग्रिम जमानत हेतु न्यायालय में याचिका पेश की जिस पर केस सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
एट्रोसिटी एक्ट में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के नागरिकों के विरुद्ध होने वाले कृत्यों को अपराध माना गया है I जैसे, उनका सामाजिक बहिष्कार करना, जान बूझ कर उन्हे सार्वजानिक रूप से अपमानित या प्रताड़ित करना,,  इत्यादि.
विवाद का विषय यह है कि इस एक्ट के सेक्शन 18 के अनुसार, यदि  इस एक्ट के अंतर्गत यदि किसी की विरुद्ध FIR  की जाती है तो उसे अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती . इसका यह भी अर्थ निकाला गया की यदि कोई कंपलेंट करे तो उसे FIR दर्ज़ कर गिरफ्तार करना है भले ही बाद में कोर्ट में केस झूठा सिद्ध हो पर उसे पहले जेल जाना होगा।
विडम्बना ये है कि लूट, डकैती, बलात्कार , हत्या जैसे आरोपों में भी अग्रिम जमानत मिल सकती है पर  एट्रोसिटी एक्ट के तहत नहीं. (फैसले का पृष्ठ 15 एवं 24).  इस एक्ट का दुरूपयोग करते हुए  बड़ी संख्या में  केस विशेष रूप से शासकीय एवं अर्धशासकीय सेवकों के विरुद्ध व्यक्तिगत स्वार्थवश  फाइल किये गए हैं। 
नेशनल क्राइम रिकॉर्डस  ब्यूरो , मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स  के डाटा (क्राइम इन इंडिया 2016- सांख्यिकी) के अनुसार वर्ष 2016 में SC केसेस में 5347  केस  एवं  ST  के 912  केस झूठे  पाए गए. वर्ष  2015  में 15638  में से 11024 केसेस में आरोप मुक्त कर दिए गए , 495  केस वापस  ले लिए गए (पृष्ठ 30)।  वर्ष 2015 में कोर्ट द्वारा निष्पादित केस में  से  75 % से अधिक  केस में या तो आरोप सिद्ध नहीं हुये या केस वापस ले लिए गए  (पृष्ठ 33  )।
कोर्ट ने कहा कि सामाजिक न्याय के लिए बने इस एक्ट का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। इसे  व्यकितगत  शत्रुता के कारण बदला लेने या ब्लैकमेल करने का हथियार बनने नहीं देना चाहिए. (पृष्ट 25 ). कानून निरपराध को बचाने  एवं  दोषी  को  दंड दिलाने के लिए है. अतः  यदि प्रथम दृष्ट्या किसी ने  अपराध नहीं किया है तो सिर्फ किसी के आरोप लगा देने मात्र से सेक्शन 18 के तहत अग्रिम ज़मानत न देना उचित नहीं है।  इस तरह  स्वतंत्रता  के मूल संवैधानिक अधिकार  का हनन होगा.  यदि ऐसा नहीं हुआ तो शासकीय सेवकों  का कार्य निष्पादन कठिन होगा। सामान्य  नागरिक को भी इस एक्ट के तहत गलत केस में फंसा देने की धमकी दे कर  ब्लैक मेल किया जा सकता है। (पृष्ठ 67 ) .
अंततः कोर्ट ने कहा की एट्रोसिटी  एक्ट के केस में  अग्रिम ज़मानत देने पर कोई रोक नहीं है अगर प्रथम दृष्टया केस दुर्भावनावश फ़ाइल किया गया हो।  निरपराध नागरिकों को गलत आरोपों के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए डी एस पी द्वारा समयबद्ध प्राथमिक जांच की जानी चाहिए एवं केस रजिस्टर होने के बाद भी गिरफ़्तारी आवश्यक नहीं है। इस एक्ट के हो रहे दुरूपयोग के मद्देनज़र   शासकीय सेवकों को बिना नियुक्तिकर्ता अधिकारी की अनुमति के  गिरफ्तार नहीं किया जा सकेगा।  गैर शासकीय सेवकों के केस में  जिले  की वरिष्ठ पुलिस सुपरिंटेंडेंट की अनुमति आवश्यक होगी. (पृष्ठ 86 87)।              
        * The case of Honorable Supreme Court on which all this happened: - For all the information *
* Supreme Court Case No. 416/2018 - Summary *
In the Annual Confidential Report of an SC ST Race Store Keeper of Government College of Pharmacy Karad, his senior filed an opposite comment. The store keeper filed FIR against him in the FIR Police under the SC ST Atrocity Act. Police sought permission from the Director of Technical Education to arrest those officers who were not sanctioned. About five years later, the said storekeeper filed FIR against Director Technical Education. (Pages 3, 4). The director presented a petition in the court for anticipatory bail on which the case reached the Supreme Court.
The acts against the citizens of scheduled castes and scheduled tribes in the Atrocity Act have been considered as crimes, such as, their social exclusion, deliberately humiliating or torturing them, etc.
The subject of the dispute is that according to section 18 of the Act, if FIR is filed against someone under this Act, then it can not get advance bail. It has also been interpreted that if a compliant does, then he has to file FIR and file it, even if the case is proved false in the court later, but he has to first go to jail.
Ironically, there can be advance bail in charges like robbery, robbery, rape and murder, but not under the Atrocity Act. (Pages 15 and 24 of the verdict). Misuse of this Act, a large number of cases have been filed personally, against the government and semi-official servants.
 According to the National Crime Records Bureau, Data from Ministry of Home Affairs (Crime in India 2016- Statistics), in the year 2016, 5347 cases and 912 cases of STs were found to be false in SC cases. In 2015, out of 15638 cases, charges were dropped in 11024 cases, 495 cases were withdrawn (page 30). In the case of more than 75% of cases executed by the court in year 2015, either the charges were not proved or the cases were withdrawn (page 33).
 The court said that this act made for social justice should not be misused. It should not be a weapon to take revenge or blackmail because of personal animosity. (Page 25). The law is to save the innocent and to punish the culprit. So, if someone has not committed a crime at first, then it is not fair to give an advance security under section 18, just by charging someone. In this way the basic constitutional right of liberty will be abrogated. If it does not happen then the performance of the government servants will be difficult. Blackmail can also be done by threatening the common citizen to be implicated in the wrong case under this Act. (Page 67).
Eventually, the court said that there is no restriction on granting advance bail in the case of Atrocity Act if the first case was filed maliciously. In order to protect innocent citizens from the adverse effects of false allegations, a preliminary inquiry should be done by the DSP, and arrest is not necessary even after registering the case. In view of the misuse of this Act, the government servants will not be arrested without the permission of the Nomination Officer. The permission of the senior police superintendent of the district will be necessary in case of non-government servants. (Page 86 87).

सलमान खान के इमानदार बॉडीगार्ड का हश्र

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सलमान का एक चेहरा यह भी...
साल 2006 । मुंबई के चर्चित हिट एंड रन मामले में बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान मुंबई के बेस्ट डिफेंस लॉयर को हायर करते हैं । उनके वकील को पहली ही मुलाकात में समझा दिया जाता है । उनका पहला टारगेट बनता है ईमानदार और खुद्दार कांस्टेबल रविन्द्र पाटिल।
आपकीं जानकारी के लिए रविन्द्र पाटिल सरकार की ओर से सलमान खान को उपलब्ध करवाया गया सुरक्षाकर्मी था , बॉडीगार्ड था । मुम्बई में सलमान की गाड़ी जब फुटपाथ पर सोए लोगों पर चढ़ी थी तो कार में सल्लू के साथ रविंद्र पाटिल भी बैठे थे। पाटिल के मुताबिक उन्होंने सलमान को तेज गति से कार चलाने से मना किया था पर सलमान नहीं माने, और यह दुर्घटना हो गई। बाद में पाटिल ने पुलिस में अपना बयान दर्ज कराया । पुलिस ने उन्हें मुख्य गवाह बनाया । ध्यान रहे पाटिल ही एकमात्र ऐसे गवाह थे, जिनका कहना था कि कार ऐक्सिडेंट सलमान के नशे की हालत में तेज रफ्तार पर कार चलाने से हुआ। वह कोई टेक्निकल एरर नहीं था।
पाटिल ने अपना यह बयान मरते दम तक नहीं बदला।पाटिल भले ही बहादुर थे , ईमानदार थे । लेकिन उनमें एक कमी थी । वे सरकारी पुलिस में कॉन्स्टेबल/ सिपाही रैंक पर थे। फोर्स में सबसे छोटी और कमजोर रैंक पर। वह अकेले इस मामले में कुछ भी कर पाने में सक्षम नही थे । लेकिन यह बात वे बहुत देर से समझे कि उनका मुकाबला एक निर्मम गैंग से होने जा रहा है। पाटिल नही जानते थे कि सलमान एक ऐसा नाम है जिसके फैन और लिंक हर कहीं है । अंडरवर्ड से ले कर पुलिस विभाग तक । रविन्द्र जब तक समझते तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उनको मौत की हद तक प्रताड़ना दी गयी थी जिसके चलते उनकी जिन्दगी तबाह हो गयी ।
तो हुआ यूं कि कोर्ट और सिस्टम ने सबसे पहले टारगेट बनाया पाटिल को। सलमान गैंग और बिकाऊ मीडिया के छोटे हिस्से ने पाटिल को ही अपराधी बताना शुरू कर दिया । लगातार क्रॉस एग्जामिनेशन से परेशान होकर पाटिल एक दिन घर से भाग गया। जिसकी एफआईआर पाटिल के भाई ने पुलिस में दी। आश्चर्य की बात देखिये कि  पुलिस ने पाटिल के खिलाफ ही अरेस्ट वॉरंट जारी कर दिये । अब तो डर के मारे पाटिल ने तारीख पर जाना बंद कर दिया। बाद में पुलिस ने उसे खतरनाक अपराधी कीे तरह  पकड़कर आर्थर रोड जेल भेज दिया गया। पाटिल ने क्राइम ब्रांच में अपनी दुहाई भेजी, जिसे अनसुना कर दिया गया।
जब पाटिल जेल से छूटा तो उसे पुलिस में वापस नौकरी नहीं मिली। तकरीबन एक साल के शोषण के बाद 2007 में मुंबई के एक सरकारी हॉस्पिटल में पाटिल भर्ती पाए गए।  पता चला वह मुंबई की रेड लाइट्स पर भीख मांगते वक्त बेहोश होने पर हॉस्पिटल लाये गए थे । पाटिल के परिवार वालों के पास उनकी कोई सूचना नहीं थी। सरकारी वॉर्ड के बेड नंबर 189 पर दवाइयों के अभाव में पाटिल लंबे वक्त तक तड़पते रहे और उनकी टीबी विकराल रूप लेती गई। कुछ ही दिन बाद उनकी मौत हो गई।
पिछले 2 दिनों से सलमान की सजा पर उनके समर्थन में बड़ी बड़ी पर्सनेलिटीज से लेकर आम आदमी को देखता हूँ तो मन उद्विग्न हो जाता है । मन मे सवाल उठता है कि 'एंटरटेनर सलमान' एक 'गुनहगार सलमान' पर हमेशा भारी कैसे पड़ जाता है । जबसे मैंने रविंद्र पाटिल के बारे में जाना, सलमान का स्टारडम मुझे बहुत ही छोटा नजर आने लगा है । साथ ही छोटे नजर आने लगे हैं वो लोग जो सलमान का समर्थन कर रहे हैं । भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे इस देश के लिए पाटिल जैसे ईमानदार लोगों का बचे रहना बहुत जरूरी है। और यह सुनिश्चित करना कि ऐसे लोग बचे रहें, हमारा और आपका काम है , हमारा फर्ज है ।
सलमान का काला सच और पाटिल का बलिदान सभी को जानना चाहिए । मुख्य मीडिया सलमान की रोती हुई बहिनों और उससे जेल में मिलने आने वाली प्रीति जिंटा जैसी हीरोइनों की तस्वीरें लगातार छापेगा लेकिन रविन्द्र पाटिल जैसे खुद्दार बोडीगार्डस का सच नही बताएगा ।
नमन रविन्द्र पाटिल को । नमन उनकी ईमानदारी को । नमन उनके अडिग व्यक्तित्व को ।
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          One of Salman's face is also ...
Year 2006 In Mumbai's famous hit and run case, Bollywood superstar Salman hires Mumbai's Best Defense Loire. Their counsel is explained in the first meeting. Their first target is to be honest and Khusta Constable Ravindra Patil.
For your information Ravindra Patil was a security guard made available to Salman Khan by the government, bodyguard was. In Mumbai, when Salman's car was climbing on the sidewalk, Ravindra Patil was sitting with Sallu in the car. According to Patil, he told Salman not to drive a car at a speedy pace but Salman did not believe it, and the accident happened. Later, Patil filed his statement in the police. The police made him the chief witness. Careful, Patil was the only Witness who had said that the car accident happened due to Salman's drunken driving while driving a car at high speed. It was not a technical error.
Patil did not change this statement till he died.Putal, though brave, were honest. But there was a lack of them. He was on the constable / soldier rank in the Government Police. On the smallest and weak ranks in the Force. He was not able to do anything in this case alone. But they have long understood that they will face a ruthless gang. Patil did not know that Salman is a name whose fan and link are everywhere. From the underworld to the police department. By the time Ravindra understood it was too late. They were tortured to the extent of death, which led to their lives being devastated.
It was then that the court and the system first created the target Patil. Salman gang and small part of the selling media started to tell Patil the culprit. Disturbed by a consistent cross examination, Patil ran away from home one day. The FIR of the FIR was given by the brother of the police. See the surprise that the police issued an arrest warrant against Patil. Now, with fear, Patil stopped going on the date. Later the police caught him like a dangerous criminal and sent to Arthur Road Jail. Patil sent an invitation to the Crime Branch, which was unheard of.
When Patil got out of jail, she did not get a job back in the police. After about a year's exploitation, Patil was found in a government hospital in Mumbai in 2007. It was revealed that he was brought to hospital when he was begging at the Red Light of Mumbai. Patil's family members did not have any information about him. In the absence of medicines for the government ward bed number 189, Patil remained agitated for a long time and his TB took a vitiated look. He died a few days later.
Since the last two days, Salman's conviction in the support of his big personalities and the common man, the mind becomes disturbed. The question arises in the minds of how 'Entertainer Salman' always gets heavily on a 'Guilty Salman'. Ever since I got to know about Ravindra Patil, Salman's stardom started to look a little too short. Also, small ones are beginning to see people who are supporting Salman. It is very important for the honest people like Patil to remain alive for this country immersed in the grip of corruption. And to ensure that such people survive, ours and your work is our duty.
Salman's black truth and Patil's sacrifice should be known to all. The main media will continue to publish photographs of heroines like Preity Zinta, who are weeping sisters and Salman, who will be seen in jail, but will not tell the truth of Khudder Bodyguards like Ravindra Patil.
Naman Ravindra Patil Naman their honesty Naman to his stubborn personality
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