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Sunday, April 1, 2018

कांग्रेस नेहरू की करतूत। ।सोमनाथ मंदिर के लिए डा. राजेंद्र प्रसाद को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी

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सोमनाथ मंदिर के लिए डा. राजेंद्र प्रसाद को बड़ी कीमत चुकानी पड़ी
ये जगजाहिर है कि जवाहल लाल नेहरू सोमनाथ मंदिर के पक्ष में नहीं थे. महात्मा गांधी जी की सहमति से सरदार पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का काम शुरु किया था. पटेल की मौत के बाद मंदिर की जिम्मेदारी के एम मुंशी पर आ गई. मुंशी नेहरू की कैबिनेट के मंत्री थे. गांधी और पटेल की मौत के बाद नेहरू का विरोध और तीखा होने लगा था. एक मीटिंग में तो उन्होंने मुंशी की फटकार भी लगाई थी. उन पर हिंदू-रिवाइवलिज्म और हिंदुत्व को हवा देने का आरोप भी लगा दिया. लेकिन, मुंशी ने साफ साफ कह दिया था कि सरदार पटेल के काम को अधूरा नहीं छोड़ेगे.
के एम मुंशी भी गुजराती थे इसलिए उन्होंने सोमनाथ मंदिर बनवा के ही दम लिया. फिर उन्होंने मंदिर के उद्घाटन के लिए देश के पहले राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद को न्यौता दे दिया. उन्होंने इस न्यौते को बड़े गर्व से स्वीकार किया लेकिन जब जवाहर लाल नेहरू को इसका पता चला तो वो नाराज हो गए. उन्होंने पत्र लिख कर डा. राजेंद्र प्रसाद को सोमनाथ जाने से मना कर दिया. राजेंद्र बाबू भी तन गए. नेहरू की बातों को दरकिनार कर वो सोमनाथ गए और जबरदस्त भाषण दिया था. जवाहर लाल नेहरू को इससे जबरदस्त झटका लगा. उनके इगो को ठेंस पहुंची. उन्होंने इसे अपनी हार मान ली. डा. राजेंद्र प्रसाद को सोमनाथ जाना बड़ा महंगा पड़ा क्योंकि इसके बाद नेहरू ने जो इनके साथ सलूक किया वो हैरान करने वाला है.
सोमनाथ मंदिर की वजह से डा. राजेंद्र प्रसाद और जवाहर लाल नेहरू के रिश्ते में इतनी कड़वाहट आ गई कि जब राजेंद्र बाबू राष्ट्रपति पद से मुक्त हुए तो नेहरू ने उन्हें दिल्ली में घर तक नहीं दिया. राजेंद्र बाबू दिल्ली में रह कर किताबें लिखना चाहते थे. लेकिन, नेहरू ने उनके साथ अन्याय किया. एक पूर्व राष्ट्रपति को जो सम्मान मिलना चाहिए, उनका जो अधिकार था उससे उन्हें वंचित कर दिया गया. आखिरकार, डा. राजेंद्र प्रसाद को पटना लौटना पड़ा. पटना में भी उनके पास अपना मकान नहीं था. पैसे नहीं थे. नेहरू ने पटना में भी उन्हें कोई घर नहीं दिया जबकि वहां सरकारी बंगलो और घरों की भरमार थी.
डा. राजेंद्र प्रसाद आखिरकार पटना के सदाकत आश्रम के एक सीलन भरे कमरे में रहने लगे. न कोई देखभाल करने वाला और न ही डाक्टर. उनकी तबीयत खराब होने लगी. उन्हें दमा की बीमारी ने जकड़ लिया. दिन भर वो खांसते रहते थे. अब एक पूर्व राष्ट्रपति की ये भी तो दुविधा होती है कि वो मदद के लिए गिरगिरा भी नहीं सकता. राजेंद्र बाबू के पटना आने के बाद नेहरू ने कभी ये सुध लेने की कोशिश भी नहीं कि देश का पहला राष्ट्रपति किस हाल में जी रहा है.
इतना ही नहीं, जब डा. राजेंद्र प्रसाद की तबीयत खराब रहने लगी, तब भी किसी ने ये जहमत नहीं उठाई कि उनका अच्छा इलाज करा सके. बिहार में उस दौरान कांग्रेस पार्टी की सरकार थी. आखिर तक डा. राजेन्द्र बाबू को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलीं. उनके साथ बेहद बेरुखी वाला व्यवहार होता रहा. मानो ये किसी के निर्देश पर हो रहा हो. उन्हें कफ और खासी शिकायत रहती थी. उनकी कफ और खासी को दूर करने के लिए पटना मेडिकल कालेज में एक मशीन थी. उसे भी दिल्ली भेज दिया गया. यानी राजेन्द्र बाबू को मारने का पूरा और पुख्ता इंतजाम किया गया.
एक बार जय प्रकाश नारायण उनसे मिलने सदाकत आश्रम पहुंचे. वो देखना चाहते थे कि देश पहले राष्ट्रपति और संविधान सभा के अध्यक्ष आखिर रहते कैसे हैं. जेपी ने जब उनकी हालत देखी तो उनका दिमाग सन्न रह गया. आंखें नम हो गईं. उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वो क्या कहें. जेपी ने फौरन अपने सहयोगियों से कहकर राजेंद्र बाबू के कमरे को रहने लायक बनवाया. लेकिन, उसी कमरे में रहते हुए राजेन्द्र बाबू की 28 फरवरी,1963 को मौत हो गई.
डा. राजेंद्र प्रसाद की मौत के बाद भी नेहरू का कलेजा नहीं पसीजा. उनकी बेरुखी खत्म नहीं हुई. नेहरू उनकी अंत्येष्टि में शामिल तक नहीं हुए. जिस दिन उनकी आखरी यात्रा थी उस दिन नेहरू जयपुर चले गए. इतना ही नहीं, राजस्थान के राज्यपाल डां. संपूर्णानंद पटना जाना चाह रहे थे लेकिन नेहरू ने उन्हें वहां जाने से मना कर दिया. जब नेहरु को मालूम चला कि संपूर्णानंद जी पटना जाना चाहते हैं तो उन्होंने संपूर्णानंद से कहा कि ये कैसे मुमकिन है कि देश का प्रधानमंत्री किसी राज्य में आए और उसका राज्यपाल वहां से गायब हो. इसके बाद डा. संपूर्णानंद ने अपना पटना जाने का कार्यक्रम रद्द किया.
यही नहीं, नेहरु ने राजेन्द्र बाबू के उतराधिकारी डा. एस. राधाकृष्णन को भी पटना न जाने की सलाह दी. लेकिन, राधाकृष्णन ने नेहरू की बात नहीं मानी और वो राजेन्द्र बाबू के अंतिम संस्कार में भाग लेने पटना पहुंचे. जब भी दिल्ली के राजघाट से गुजरता हूं तो डा. राजेंद्र प्रसाद के साथ नेहरू के रवैये को याद करता हूं. अजीब देश है, महात्मा गांधी के बगल में संजय गांधी जैसों को जगह मिल सकती है लेकिन देश के पहले राष्ट्रपति के लिए इस देश में कोई इज्जत ही नहीं है. ऐसा लगता है कि इस देश में महानता और बलिदान की कॉपी राइट सिर्फ नेहरू-गांधी परिवार के पास है.                     
Dr. Rajendra Prasad paid a big price for Somnath temple
It is well known that the Jawaharlal Nehru was not in favor of Somnath temple. With the consent of Mahatma Gandhi, Sardar Patel started the reconstruction of the Somnath temple. After Patel's death, the temple's responsibility came on M. Munshi. Munshi was the minister of Nehru's cabinet. After Gandhi and Patel's death, Nehru's opposition and opposition began to be intensified. In a meeting, he also reprimanded Munshi. They also accused him of airing Hindu-Revivalism and Hindutva. But, Munshi had clearly said that Sardar Patel's work will not be left incomplete.
K M Munshi also guided him and therefore he got the help of making Somnath temple. Then he invited the country's first President, Dr. Rajendra Prasad, to inaugurate the temple. He accepted this invitation with great pride, but when Jawaharlal Nehru came to know of this he became angry. By writing a letter, Dr. Rajendra Prasad refused to go to Somnath. Rajendra Babu was also tan. Bypassing Nehru's things, he went to Somnath and gave a tremendous speech. Jawaharlal Nehru suffered a tremendous shock Thiago reached his Iago. They accepted this defeat. It was expensive to go to Dr. Rajendra Prasad Somnath because after this Nehru, who worked with him, would be astonished.
Due to Somnath Temple, there was so much bitterness in the relationship between Dr. Rajendra Prasad and Jawaharlal Nehru that when Rajendra Babu was freed from the presidency, Nehru did not give him up to the house in Delhi. Rajendra Babu wanted to write books by staying in Delhi. However, Nehru did injustice to them. The respect which a former president should get, he was denied his right. After all, Dr. Rajendra Prasad had to return to Patna. Even in Patna, they did not have their own house. There were no money. Nehru did not give any home to him even in Patna, while there was a lot of government bungalows and houses.
Dr. Rajendra Prasad finally started living in a sealed room in Patna's Sadakat Ashram. Neither any caretaker nor doctor Their health began to worsen. They got confused with asthma. Throughout the day they used to cough. Now a former president has a dilemma that he can not even get help for the help. After the arrival of Rajendra Babu in Patna, Nehru never tried to get the benefit of this, that the country's first President is living in what situation.
 
Not only this, when Dr. Rajendra Prasad's health started getting worse, no one even raised this bother that he could get good treatment. During that time in Bihar the Congress party was the government. By the end, Dr. Rajendra Babu did not get good health facilities. He was being treated with very illusory behavior. Suppose it is happening on somebody's direction. He used to complain and complain. There was a machine in Patna Medical College to remove his cough and cough. He was also sent to Delhi. That is, complete and firm arrangements were made to kill Rajendra Babu.
Once Jai Prakash Narayan reached the Sadakat Ashram to meet him. They wanted to see how the President was the first President and President of the Constituent Assembly. When JP saw his condition, his mind was stunned. The eyes became moist. They did not understand what they would say. JP immediately asked his colleagues to make room for Rajendra Babu's living room. But, while staying in the same room, Rajendra Babu died on February 28, 1963.
Even after the death of Dr. Rajendra Prasad, Nehru's liverity did not get exhausted. His helplessness did not end. Nehru did not get involved in his funeral. On the day of his last visit, Nehru went to Jaipur. Not only that, Rajasthan Governor D. Sampurnand wanted to go to Patna but Nehru refused to go there. When Nehru came to know that Sarvandan ji wanted to go to Patna, then he said to Swaranand how it is possible that the Prime Minister of the country came to some state and his governor disappeared from there. After this Dr. Abharmanand canceled his visit to Patna.
Not only this, Nehru, the successor of Rajendra Babu, Dr. S. Radhakrishnan also advised not to go to Patna. However, Radhakrishnan did not listen to Nehru and he reached Patna to participate in the funeral of Rajendra Babu. Whenever I pass through Delhi's Rajghat, I remember Nehru's attitude with Dr. Rajendra Prasad. Strange country, like Sanjay Gandhi can be found next to Mahatma Gandhi, but there is no respect in this country for the country's first President. It seems that the copy of greatness and sacrifice is right in the country right now with the Nehru-Gandhi family.

पुण्य और पाप ।

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पितामह भीष्म के जीवन का एक ही पाप था कि उन्होंने समय पर क्रोध नहीं किया...(द्रोपदी चीर हरण के समय)
                और
जटायु के जीवन का एक ही पुण्य था कि उसने समय पर क्रोध किया*.(माता सीता के हरण के समय।)
समय आने पर मृत्यु दोनों की हुई किन्तु...
"परिणामस्वरुप एक को बाणों की  शैय्या मिली और एक को श्री राम की गोद."
          वेद कहता है-- "क्रोध भी तब पुण्य बन जाता है जब वह धर्म और मर्यादा के लिए किया जाए और सहनशीलता भी तब पाप बन जाती है जब वह धर्म और मर्यादा को बचा ना पाये
           राम राम सा拏拏
             ।। जय श्रीराम ।।

पिता ,बेटी का प्यार।।।।।

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*_Very nice story_*
*_पिता बेटी~_*
*_पापा मेने आपके लिए हलवा बनाया है 11 साल की बेटी_*
*_अपने पिता से बोली जो की अभी ऑफिस से घर में घुसा ही था_*
*_पिता_ - वाह क्या बात है,लाकर खिलाओ फिर पापा को !!*
*_बेटी दौड़ती हुई फिर रसोई में गई और बड़ा कटोरा भरकर हलवा लेकर आई_*
*_पिता ने खाना शुरू किया और बेटी को देखा पिता की आखो में आशू थे_*
*क्या हुआ पापा हलवा अच्छा नहीं लगा*
*पिता - नहीं मेरी बेटी बहुत अच्छा बना है , और देखते देखते पूरा कटोरा खाली कर दिया*
*इतने में माँ बाथरूम से नहाकर बाहर आई, और बोली : ला मुझे खिला तेरा हलवा !!*
*पिता ने बेटी को 50 रुपए इनाम में दिये ।*
*बेटी खुशी से मम्मी के लिए रसोई से हलवा लेकर आई*
*मगर ये क्या जेसे ही उसने हलवा की पहली चम्मच मुँह में डाली तो तुरंत थूक दिया ।*
*और बोली ये क्या बनाया है ... ये कोई हलवा है* *इसमें चीनी नहीं नमक भरा है,*
*और आप इसे कैसे खा गए ये तो एकदम कड़वा है !!*
*पत्नी :- मेरे बनाये खाने में तो कभी नमक कम है कभी मिर्च तेज है कहते रहते हो*
*और बेटी को बजाय कुछ कहने के इनाम देते हो !!*
*पिता हँसते हुए : पगली ... तेरा मेरा तो जीवन भर का साथ है ...*
*रिश्ता है पति पत्नी का, जिसमे नोक झोक .. रूठना मनाना सब चलता है !!*
*मगर ये तो बेटी है कल चली जाएगी ।*
*आज इसे बो अहसास ... बो अपनापन महसूस हुआ जो मुझे इसके जन्म के समय हुआ था ।*
*आज इसने बड़े प्यार से पहली बार मेरे लिए कुछ बनाया है ,*
*फिर बो जैसा भी हो मेरे लिए सबसे बेहतर और सबसे स्वादिष्ट है !!*
*ये बेटिया अपने पापा की परीया और राजकुमारी होती है जेसे तुम अपने पापा की हो !!*
*वो रोते हुए पति के सीने से लग गई और सोच रही थी ... इसी लिए हर लड़की अपने पति में  अपने पापा की छवि ढूंढ़ती है !!*
*दोस्तों ... यही सच है,*
*हर बेटी अपने पिता के बड़े करीब होती है या यूँ कहे कलेजे का टुकड़ा*
*इसलिए शादी में विदाई के समय सबसे ज्यादा पिता ही रोता है !!*

*कई जन्मों की जुदाई के बाद बेटी का जन्म होता है ,*
*इसलिए तो कन्या दान करना सबसे बड़ा पूण्य होता है !!*!_*

             *✍ _g_ .*
_Love you dad

अप्रैल फुल हम क्यों मनाते है ।

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अप्रैल फूल" किसी को कहने से पहले
इसकी
वास्तविक सत्यता जरुर जान ले.!!
पावन महीने की शुरुआत को मूर्खता दिवस
कह रहे
हो !!
पता भी है क्यों कहते है अप्रैल फूल (अप्रैल फुल
का
अर्थ है - हिन्दुओ का मूर्खता दिवस).??
ये नाम अंग्रेज ईसाईयों की देन है…
मुर्ख हिन्दू कैसे समझें "अप्रैल फूल" का मतलब बड़े
दिनों से बिना सोचे समझे चल रहा है अप्रैल फूल,
अप्रैल फूल ???
इसका मतलब क्या है.?? दरअसल जब ईसाइयत अंग्रेजो
द्वारा हमे 1 जनवरी का नववर्ष थोपा गया तो उस
समय लोग विक्रमी संवत के अनुसार 1 अप्रैल से
अपना
नया साल बनाते थे, जो आज भी सच्चे हिन्दुओ
द्वारा मनाया जाता है, आज भी हमारे बही
खाते
और बैंक 31 मार्च को बंद होते है और 1 अप्रैल से शुरू
होते है, पर उस समय जब भारत गुलाम था तो ईसाइयत
ने विक्रमी संवत का नाश करने के लिए साजिश करते
हुए 1 अप्रैल को मूर्खता दिवस "अप्रैल फूल" का नाम
दे दिया ताकि हमारी सभ्यता मूर्खता लगे अब आप
ही सोचो अप्रैल फूल कहने वाले कितने
सही हो
आप.?
यादरखो अप्रैल माह से जुड़े हुए इतिहासिक दिन और
त्यौहार

1. हिन्दुओं का पावन महिना इस दिन से शुरू होता है
(शुक्ल प्रतिपदा)
2. हिन्दुओ के रीति -रिवाज़ सब इस दिन के कलेण्डर
के अनुसार बनाये जाते है।
6. आज का दिन दुनिया को दिशा देने वाला है।
अंग्रेज ईसाई, हिन्दुओ के विरुध थे इसलिए हिन्दू के
त्योहारों को मूर्खता का दिन कहते थे और आप
हिन्दू भी बहुत शान से कह रहे हो.!!
गुलाम मानसिकता का सुबूत ना दो अप्रैल फूल लिख
के.!!
अप्रैल फूल सिर्फ भारतीय सनातन कलेण्डर, जिसको
पूरा विश्व फॉलो करता था उसको भुलाने और
मजाक उड़ाने के लिए बनाया गया था। 1582 में पोप
ग्रेगोरी ने नया कलेण्डर अपनाने का फरमान
जारी
कर दिया जिसमें 1 जनवरी को नया साल का प्रथम
दिन बनाया गया।
जिन लोगो ने इसको मानने से इंकार किया, उनको 1
अप्रैल को मजाक उड़ाना शुरू कर दिया और धीरे-
धीरे
1 अप्रैल नया साल का नया दिन होने के बजाय मूर्ख
दिवस बन गया।आज भारत के सभी लोग अपनी ही
संस्कृति का मजाक उड़ाते हुए अप्रैल फूल डे मना रहे
है।
जागो हिन्दुओ जागो।।
अपने धर्म को पहचानो।
इस जानकारी को इतना फैलाओ कि कोई भी इस आने वाली 1 अप्रैल से मूर्खता का परिचय न दे और और अंग्रेजों द्वारा प्रसिद्ध किया गया ये हिंदुओं का मजाक बंद होजाये ।
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         April Fool "Before Saying Someone
his
Know the real truthfulness. !!
Fools day on the start of the month
Telling
Ho !!
Know also why it is called April Fools (April Fool)
Of
Meaning - Hindutva's stupidity day). ??
This name is the gift of English Christians ...
How to understand a silly Hindu "April Fool" means big
It's going to be unthinkable from the days April Fool,
April fool ???
what does it mean.?? Actually when Christianity is British
If we were imposed on 1 January of the new year then
Time from 1st April, according to Vikram Samvat
ours
Used to make new year, which is still true Hindu
Is celebrated by, even today our sister
Accounts
And banks close on March 31 and start from April 1
But at that time when India was a slave, then Christianity
Conspired to destroy Vikram Sakhi
On April 1, the name of the foolish day "April Fool"
So that our civilization is stupid
Think how many
Right
you.?
Jatakharo is associated with the history of the month of April and
The festival
1. The holy month of Hindus starts from this day
(Shukla Pratipada)
2. The customs of Hindus, all this day's calendars
Are made according to.
6. Today's day is about giving direction to the world.
The British Christians were against Hindus, hence Hindu
Festivals were called the day of idiocy and you
Hindus are also saying very proudly. !!
Do not know
K. !!
April Fool is the only Indian Sanatan calendar, which
The whole world was following and forgetting it
The joke was made to blow. Pope in 1582
Gregory decides to adopt a new calendar
Ongoing
Made the 1st of January new year
Day was built.
Those people who refused to obey them,
Started to joke on April and slowly,
Slow
April 1 April fools rather than being new day
The day has come. Today all the people of India
Celebrating April Fool's Day while joking culture
is.
Jago Hindoo jago ..
Recognize your religion.
Spread this information so much that no one should introduce stupidity in the coming April 1 and stop the jokes of these Hindus who were made famous by the British.
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